इजरायल और ईरान के बीच तनाव अब खुली जंग में बदलता दिख रहा है। दोनों देशों की तरफ से हमले और जवाबी कार्रवाई की खबरें आ रही हैं। इस टकराव ने पूरे मिडिल ईस्ट में डर और अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। कई देशों ने अपने यहां अलर्ट जारी कर दिया है। दुनिया इसलिए चिंतित है क्योंकि यह इलाका तेल उत्पादन का बड़ा केंद्र है। अगर जंग लंबी चली तो इसका असर सिर्फ इन दो देशों पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। भारत भी इस हालात को लेकर सतर्क है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता – तेल
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल होर्मुज़ जलडमरूमध्य नाम के समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। अगर जंग की वजह से यह रास्ता बंद होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो भारत को तेल मिलने में दिक्कत हो सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं और महंगाई बढ़ सकती है। अभी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है।
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय भी चिंता में
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं। अगर वहां हालात बिगड़ते हैं तो उनकी सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन सकती है। भारत सरकार ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दूतावास हालात पर नजर रख रहे हैं। जरूरत पड़ी तो भारतीयों को सुरक्षित निकालने की योजना भी बनाई जा सकती है। इसलिए यह जंग सिर्फ राजनीति या सेना का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी से भी जुड़ा है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर दोनों देश बातचीत का रास्ता अपनाते हैं तो हालात संभल सकते हैं। लेकिन अगर हमला और जवाबी हमला चलता रहा तो असर और गहरा होगा। तेल महंगा होगा, बाजार गिर सकते हैं और दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। भारत इस समय संतुलन बनाकर चल रहा है और कोशिश कर रहा है कि उसके हित सुरक्षित रहें। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि क्या जंग रुकेगी या और बढ़ेगी।
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