मध्य-पूर्व एक बार फिर वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की राजधानी और कुछ अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और एयर स्ट्राइक किए गए। इज़राइल ने अपने देश में आपातकाल घोषित कर दिया है और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। कई शहरों में सायरन बजने की खबरें सामने आई हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। भारत से तेल अवीव जाने वाली एक फ्लाइट को भी सुरक्षा कारणों से वापस लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया का ध्यान फिर से मध्य-पूर्व की ओर खींच लिया है।
ट्रंप का सख्त संदेश – “ईरान की मिसाइलें मिट्टी में मिला देंगे”
हमले के तुरंत बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता और सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना है। ट्रंप ने विशेष रूप से IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) का नाम लेते हुए कहा कि या तो वे तुरंत सरेंडर करें या फिर गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। राष्ट्रपति ने दावा किया कि यह कार्रवाई ईरान से संभावित खतरे को रोकने के लिए जरूरी थी। उनके बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सही है या इससे हालात और बिगड़ सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा और किसी भी प्रकार के हमले का जवाब और अधिक सख्ती से दिया जाएगा।
ईरान का रुख सख्त, पलटवार की चेतावनी
दूसरी तरफ ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे इस हमले को उकसावे वाली कार्रवाई मानते हैं और इसका जवाब देंगे। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उनकी रक्षा प्रणाली सक्रिय है और वे अपने देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान ने इज़राइल की ओर मिसाइल दागने की कोशिश की, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है। ईरानी सेना और IRGC को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राजधानी और अन्य बड़े शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जनता से शांत रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें धमाकों और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
क्या बढ़ सकता है युद्ध का दायरा?
इस घटनाक्रम के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी स्थिति पर नजर रखी हुई है और कूटनीतिक समाधान की बात कही है। तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो इस संघर्ष के आर्थिक असर की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबे समय तक जारी रहा तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह संघर्ष बड़े युद्ध का रूप लेगा या नहीं, लेकिन हालात बेहद संवेदनशील हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत और अंतरराष्ट्रीय दबाव इस संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन, तेल अवीव और तेहरान पर टिकी हैं।
