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अरब सागर के नीचे चलने वाली है सबसे बड़ी चाल, सीधे भारत पहुंचेगा गैस का खजाना, खतरे में दुनिया के कई देश!

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आई बड़ी खुशखबरी! अरब सागर के नीचे बिछने जा रही है 2000 किमी लंबी गैस पाइपलाइन। जानिए कैसे ओमान से सीधा भारत पहुंचेगा गैस का खजाना और क्यों कांपेंगे दुश्मन।

भारत

भारत की ऊर्जा जरूरतों और तेल-गैस के संकट को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक बेहद चौंकाने वाली योजना पर काम चल रहा है। भारत और ओमान के बीच एक ऐसी समुद्री गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी है, जो सीधे समंदर के रास्ते भारत के गुजरात राज्य को जोड़ेगी। लगभग 2000 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन भारत के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगी। इस ऐतिहासिक कदम से न सिर्फ देश में गैस की किल्लत दूर होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली उठापटक और दुश्मनों की बुरी नजर से भी भारत पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट जैसे ही जमीन पर उतरेगा, भारत की ताकत पूरी दुनिया में कई गुना बढ़ जाएगी।

समंदर की अथाह गहराई में बिछेगा जाल

इस मेगा प्रोजेक्ट की सबसे हैरान कर देने वाली बात इसकी बनावट और रूट है। यह पूरी पाइपलाइन अरब सागर के सीने को चीरते हुए समुद्र के नीचे से गुजरेगी। इसकी चुनौती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समंदर के अंदर कुछ जगहों पर इसकी गहराई 3000 मीटर यानी करीब 3 किलोमीटर से भी ज्यादा होगी। इतनी गहराई में पाइपलाइन बिछाना दुनिया के सबसे कठिन कामों में से एक माना जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, इस बेहद महत्वाकांक्षी और अनोखी योजना को पूरा करने में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आने का अनुमान है। हालांकि, अंतिम बजट तकनीकी चुनौतियों और काम की रफ्तार को देखकर तय किया जाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य का टेंशन खत्म

फिलहाल भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल और गैस खाड़ी देशों से समुद्री जहाजों के जरिए मंगाता है। ये जहाज ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते से गुजरते हैं, जहां अक्सर युद्ध या आपसी तनाव के कारण सप्लाई रुकने का खतरा बना रहता है। अगर कभी वहां हालात बिगड़ते हैं, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान छूने लगते हैं। लेकिन ओमान से सीधे आने वाली यह नई पाइपलाइन इस पूरे खतरे को हमेशा के लिए बाय-बाय कह देगी। इसके जरिए बिना किसी रुकावट के सीधे ओमान से प्राकृतिक गैस भारत पहुंचने लगेगी, जिससे देश में गैस की कीमतें भी काबू में रहेंगी और सप्लाई भी एकदम पक्की हो जाएगी।

30 साल पुराना सपना होगा सच

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत और ओमान के बीच इस तरह की पाइपलाइन बनाने का विचार कोई नया नहीं है। पिछले 30 सालों से कई बार इस योजना पर बातचीत हुई, लेकिन समुद्र की गहराई और भारी खर्च जैसी तकनीकी दिक्कतों की वजह से बात आगे नहीं बढ़ पाई थी। मगर अब बदली हुई तकनीक के दौर में दोनों देश इसे लेकर बेहद गंभीर हैं। विशेषज्ञों का तो यह भी कहना है कि यह पाइपलाइन सिर्फ आज की प्राकृतिक गैस के लिए नहीं है, बल्कि आने वाले भविष्य में इसके जरिए ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ जैसे साफ-सुथरे ईंधन को भी भारत लाया जा सकेगा। यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में भारत की किस्मत बदलने वाला साबित होगा।

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