देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार अब कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में है। सोमवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करना और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना है। सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून में बदलाव कर परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकता है। हाल के दिनों में नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद इस विषय पर लगातार दबाव बना हुआ था। अब प्रस्तावित संशोधन में जांच की समय-सीमा तय करने, फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना और जुर्माने की राशि बढ़ाने जैसे कई बड़े बदलाव शामिल किए गए हैं।
जांच दो महीने में पूरी, दोषियों को 10 साल तक की सजा का प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके साथ ही आरोपियों के खिलाफ जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हर राज्य में विशेष त्वरित अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने या इस तरह की साजिश में शामिल पाया जाता है तो उसे कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा दोषी पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं यदि अपराध किसी संगठित गिरोह या नेटवर्क के माध्यम से किया गया है तो सजा और अधिक कठोर होगी। ऐसे मामलों में कम से कम सात वर्ष की कैद और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य संगठित पेपर लीक गिरोहों पर प्रभावी रोक लगाना है।
15 तरह के अपराध होंगे कानून के दायरे में
संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े कई नए अपराधों को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इसमें केवल प्रश्नपत्र लीक ही नहीं, बल्कि ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी प्रवेश पत्र तैयार करना, नकली वेबसाइट बनाकर उम्मीदवारों को गुमराह करना, परीक्षा प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से हस्तक्षेप करना और अन्य धोखाधड़ी से जुड़े कुल 15 प्रकार के अवैध कार्यों को कानून के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। सरकार का मानना है कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ परीक्षा में धोखाधड़ी के तरीके भी बदल रहे हैं, इसलिए कानून को भी समय के अनुसार मजबूत बनाना जरूरी है। मौजूदा कानून में व्यक्तिगत अपराधों के लिए तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, जबकि अब इसे और कड़ा किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।
संसद में होगी चर्चा, छात्रों और विपक्ष की भी रहेगी नजर
यह संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश होने के साथ ही उस पर चर्चा और पारित करने के लिए भी सूचीबद्ध किया गया है। सामान्य तौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन पेश और पारित करने की प्रक्रिया कम देखने को मिलती है, इसलिए इस विधेयक पर सभी की नजर बनी हुई है। हाल के छात्र आंदोलनों और पेपर लीक विवाद के बाद सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार का संदेश देना चाहती है। दूसरी ओर विपक्ष भी इस विधेयक पर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। यदि यह संशोधन पारित हो जाता है तो देश में सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त कानूनी व्यवस्था लागू हो जाएगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस विधेयक पर क्या चर्चा होती है, क्या इसमें कोई बदलाव किया जाता है और आखिरकार यह कानून किस रूप में लागू होता है।
Read More-नए शिक्षा मंत्री बनते ही CJP का पहला संदेश आया सामने… आखिर प्रह्लाद जोशी से क्या चाहती है पार्टी?
