जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में स्थित ऐतिहासिक लाल चौक उस वक्त अचानक अंतरराष्ट्रीय सियासत का केंद्र बन गया, जब आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई। इस खबर के बाद कश्मीर में खासकर शिया समुदाय के लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। हजारों की संख्या में लोग लाल चौक पर इकट्ठा हुए और ईरान के सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। हाथों में ईरानी झंडे, खामेनेई की तस्वीरें, बैनर और पोस्टर लिए प्रदर्शनकारियों ने पूरे इलाके को नारों से गुंजायमान कर दिया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद लोगों का गुस्सा साफ तौर पर सड़कों पर दिखाई दिया।
‘रहबर तेरे खून से इंकलाब आएगा’—नारों में छलका आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा जो नारा सुनाई दिया, वह था— ‘रहबर तेरे खून से इंकलाब आएगा’। यह नारा न सिर्फ खामेनेई के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है, बल्कि पश्चिमी ताकतों के खिलाफ गहरे रोष को भी उजागर करता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के पीछे अमेरिका और इजराइल की साजिश हो सकती है। इसी वजह से भीड़ लगातार अमेरिका विरोधी नारे लगाती रही। कई लोगों का कहना था कि खामेनेई सिर्फ ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि पूरी शिया दुनिया के लिए एक मजबूत आवाज़ थे। उनकी मौत को समुदाय एक बड़ी साजिश और अन्याय के तौर पर देख रहा है।
अमेरिका-इजराइल के खिलाफ तीखे नारे, माहौल रहा तनावपूर्ण
लाल चौक पर प्रदर्शन के दौरान माहौल बेहद संवेदनशील हो गया। भीड़ से ‘एक से बढ़कर एक जलील, अमेरिका-इजराइल’ और ‘अमेरिका को जो यार है, गद्दार है’ जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। लोगों का कहना था कि मध्य पूर्व में हो रहे संघर्षों और ईरान पर लगातार बढ़ते दबाव के पीछे अमेरिका और इजराइल की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खामेनेई की मौत ने पूरी शिया बिरादरी को झकझोर दिया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। हालांकि, प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारों की तीव्रता ने माहौल को काफी तनावपूर्ण बना दिया।
कश्मीर से मध्य पूर्व तक असर, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर सवाल
खामेनेई की मौत पर कश्मीर में जिस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली, उसने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर घाटी की सियासत और भावनाओं पर कितना गहरा पड़ता है। श्रीनगर जैसे संवेदनशील इलाके में इस तरह का प्रदर्शन न सिर्फ स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति की जटिलता को भी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। कश्मीर में उभरा यह आक्रोश बताता है कि खामेनेई की मौत सिर्फ एक देश की घटना नहीं, बल्कि इसका प्रभाव सीमाओं से परे महसूस किया जा रहा है।
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