ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब जमीन से लेकर आसमान तक दिखाई देने लगा है। मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपने रूट बदल दिए हैं, जबकि कुछ ने अस्थायी रूप से उड़ानें रोक दी हैं। इसका सीधा प्रभाव भारत से मध्य पूर्व जाने वाली फ्लाइट्स पर पड़ा है। खासकर दुबई, अबू धाबी, दोहा और अन्य खाड़ी देशों के लिए उड़ान भरने वाली कई सेवाएं या तो रद्द कर दी गई हैं या उनके समय में बड़ा बदलाव किया गया है। इस अचानक हुए बदलाव से हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक उड़ानों में अनिश्चितता बनी रह सकती है।
मुंबई एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, यात्रियों में नाराज़गी
देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर हालात सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में बड़ी संख्या में यात्री फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी की वजह से परेशान दिखाई दिए। कई लोगों का आरोप है कि उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई, जिससे वे एयरपोर्ट पहुंचने के बाद ही रद्द हुई फ्लाइट की जानकारी पा सके। टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें, हेल्प डेस्क पर भीड़ और लगातार हो रही घोषणाओं के बीच यात्रियों में असमंजस और नाराज़गी साफ दिखी। एयरलाइंस की ओर से वैकल्पिक फ्लाइट या रिफंड की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण व्यवस्थाएं दबाव में हैं।
यात्रियों की आपबीती: अचानक रद्द हुई उड़ान से टूटी योजनाएं
विशाखापट्टनम से मुंबई पहुंचे यात्री कृष्णा गोपी ने बताया कि उन्हें अबू धाबी के लिए फ्लाइट पकड़नी थी, लेकिन एयरपोर्ट पहुंचने पर पता चला कि उनकी उड़ान रद्द कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उनके आगे की कनेक्टिंग फ्लाइट और होटल बुकिंग सब प्रभावित हो गई है। सिर्फ वे ही नहीं, बल्कि सैकड़ों ऐसे यात्री हैं जिनकी बिजनेस मीटिंग्स, नौकरी जॉइनिंग, मेडिकल अपॉइंटमेंट या पारिवारिक कार्यक्रम इस वजह से प्रभावित हुए हैं। कई यात्रियों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें स्पष्ट जानकारी या वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अचानक हुए इस बदलाव ने यात्रियों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से प्रभावित किया है।
कब तक सामान्य होंगे हालात? विशेषज्ञों की सलाह
एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक, जब किसी क्षेत्र में सैन्य गतिविधि बढ़ती है तो एयरलाइंस सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अपने रूट बदल देती हैं। मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए वहां का तनाव वैश्विक उड़ानों को प्रभावित करता है। भारत से खाड़ी देशों की बड़ी संख्या में उड़ानें रोज संचालित होती हैं, क्योंकि लाखों भारतीय वहां काम करते हैं। ऐसे में हालात सामान्य होने तक यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट स्टेटस की जांच जरूर करें, एयरलाइन से संपर्क में रहें और वैकल्पिक योजना तैयार रखें। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्षेत्रीय तनाव कब कम होगा और हवाई सेवाएं पूरी तरह से कब बहाल होंगी।
