Mahakal Temple: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है, जिसने श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और हलचल बढ़ा दी है। मंदिर समिति ने भस्म आरती के लिए मिलने वाली निःशुल्क अनुमति को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब तक रोजाना सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को बिना शुल्क के आरती में शामिल होने का मौका मिलता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को ऑनलाइन बुकिंग के जरिए शुल्क देना होगा। इस फैसले के बाद भक्तों को जहां एक ओर सुविधा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर मुफ्त दर्शन बंद होने से कई लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
अब पूरी तरह ऑनलाइन होगी बुकिंग प्रक्रिया
मंदिर समिति के नए नियमों के अनुसार, भस्म आरती के लिए अब ऑफलाइन परमिशन पूरी तरह से बंद कर दी गई है। पहले श्रद्धालु कई घंटों तक कतार में लगकर मुफ्त पास प्राप्त कर सकते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब रोजाना सीमित संख्या में ही लोगों को ऑनलाइन परमिशन मिलेगी और इसके लिए प्रति व्यक्ति 200 रुपए का शुल्क देना होगा। यह प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर लागू की गई है, जिससे समय की बचत तो होगी, लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी। समिति का कहना है कि इससे भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
तत्काल बुकिंग और समय में बड़ा बदलाव
नई व्यवस्था के तहत तत्काल बुकिंग का समय भी बदल दिया गया है। अब श्रद्धालु आरती से एक दिन पहले सुबह 8 बजे पोर्टल खुलते ही बुकिंग कर सकेंगे। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी को 16 अप्रैल की भस्म आरती में शामिल होना है, तो उसे 15 अप्रैल सुबह 8 बजे ऑनलाइन आवेदन करना होगा। तत्काल बुकिंग के लिए रोजाना 300 लोगों को अनुमति दी जाएगी और सभी को निर्धारित शुल्क देना होगा। इसके अलावा, नियमित बुकिंग का समय भी बदला गया है। पहले जहां तीन महीने पहले बुकिंग की सुविधा मिलती थी, अब यह अवधि घटाकर एक महीने कर दी गई है। हर महीने की पहली तारीख को सुबह 8 बजे नई बुकिंग विंडो खुलेगी।
अन्य आरतियों में भी पहले हो चुका है बदलाव
यह पहला मौका नहीं है जब मंदिर प्रशासन ने आरती व्यवस्था में बदलाव किया है। इससे पहले संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी ऑनलाइन बुकिंग और शुल्क व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इन आरतियों के लिए 250 रुपए का शुल्क तय किया गया था और दर्शन के लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई थी। हालांकि, सामान्य दर्शन के लिए अभी भी निःशुल्क व्यवस्था जारी रखी गई है, जिससे आम श्रद्धालु मंदिर में आकर दर्शन कर सकें। मंदिर समिति का मानना है कि इन बदलावों से व्यवस्था बेहतर होगी और श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि नए नियमों को लेकर भक्तों की प्रतिक्रिया आगे कैसी रहती है।
