अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और सीमित संघर्षविराम के बीच एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इसी दौरान ईरान सरकार ने चार कैदियों को फांसी देने का फैसला किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। इस खबर ने पश्चिमी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों में बहस छेड़ दी है। बताया जा रहा है कि यह मामला इसी साल जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है, जिसमें सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा के आरोप लगाए गए थे। ईरानी अदालत के अनुसार, इन लोगों ने सुरक्षा बलों को घायल किया और कथित तौर पर हथियारों का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई गई।
महिला कैदी बीता हेमती और पति पर गंभीर आरोप
फांसी की सजा पाने वालों में बीता हेमती नाम की महिला और उनके पति शामिल हैं, जिन्हें इसी साल के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीता हेमती इस मामले में पहली महिला हैं, जिन्हें इस तरह की सजा दी जा रही है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों पर हमला किया और हिंसा को बढ़ावा दिया। ईरानी अदालत ने इन्हें “अल्लाह के खिलाफ अपराध” यानी गंभीर राज्य विरोधी गतिविधि का दोषी माना है। इसी आधार पर उन्हें और अन्य तीन कैदियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। मामले में यह भी कहा गया है कि चारों की संपत्ति जब्त कर ली गई है और उन्हें “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” माना गया है।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल, अमेरिका कनेक्शन का भी दावा
इस फैसले पर मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर आपत्ति जताई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन आरोपियों पर अमेरिकी समर्थन से साजिश रचने का भी आरोप लगाया गया है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। संगठनों का कहना है कि ईरान में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए कठोर कानूनों का इस्तेमाल किया जाता है और कई मामलों में मौत की सजा दी जाती है। वहीं ईरानी प्रशासन का कहना है कि ये सभी लोग सुरक्षा बलों पर हमले और देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की गतिविधियों में शामिल थे, इसलिए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी थी।
ईरान में फांसी की प्रक्रिया और सार्वजनिक दंड पर बहस
ईरान में मौत की सजा आमतौर पर फांसी के जरिए दी जाती है, और कई मामलों में यह प्रक्रिया सुबह के समय पूरी की जाती है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि अतीत में गंभीर अपराधों के मामलों में सार्वजनिक स्थानों पर क्रेन से फांसी दिए जाने की घटनाएं भी हुई हैं, हालांकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद का विषय रहा है। वर्तमान मामले में भी अदालत ने कहा है कि 8 और 9 जनवरी के प्रदर्शनों के दौरान आरोपियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया और विस्फोटक या हथियारों का इस्तेमाल किया था। इस फैसले के बाद ईरान की न्यायिक प्रणाली और मानवाधिकारों को लेकर एक बार फिर वैश्विक बहस तेज हो गई है, जबकि मध्य पूर्व में पहले से ही तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं।