लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 28 फरवरी को आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन उस समय अचानक सुर्खियों में आ गया, जब पूर्व उप मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा के मंच पर पहुंचते ही नारेबाजी शुरू हो गई। सभागार में मौजूद लोगों ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नियमों को लेकर “यूजीसी पर बोलो” जैसे नारे लगाए, जिससे पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया। शुरुआत में इसे सामान्य असहमति माना गया, लेकिन देखते ही देखते यह विरोध व्यापक रूप लेता चला गया। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक एकजुटता दिखाना था, लेकिन यूजीसी से जुड़े विवाद ने कार्यक्रम की दिशा ही बदल दी।
नेताओं के बयान और UGC विवाद की चिंगारी
सम्मेलन में मौजूद पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने मंच से कहा कि ब्राह्मण कोई जाति नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूजीसी नियमों के मामले में चूक हुई है और भाजपा कार्यकर्ता होने के बावजूद उन्होंने इस पर तत्काल आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि आवश्यकता पड़ी तो वे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक अपनी बात पहुंचाएंगे। वहीं, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया ने समाज से एकजुट रहने की अपील की। कार्यक्रम में पूर्व सांसद डॉ. अशोक वाजपेयी सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सम्मेलन के संयोजक राजेंद्रनाथ त्रिपाठी रहे, जिन्होंने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन नारेबाजी थमती नजर नहीं आई।
फरसा, नाराजगी और बढ़ता विवाद
सम्मेलन के दौरान उस समय स्थिति और बिगड़ गई जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री मंच पर फरसा लेकर पहुंचे। उन्होंने सरकार को गैर-सनातनी बताते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। इस पर मंच से ही नाराजगी जताई गई और कुछ भाजपा समर्थकों ने विरोध किया, जिसके जवाब में उनके खिलाफ भी नारे लगे। अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने के समर्थन में हाथ उठाने का आह्वान किया, जिस पर सभा में मौजूद कई लोगों ने समर्थन जताया। इस घटनाक्रम ने सम्मेलन को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे।
भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के प्रबुद्ध सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंच से भरोसा दिलाया कि सरकार ब्राह्मण समाज के साथ अन्याय नहीं होने देगी और उनकी भावनाओं को गंभीरता से समझती है। वहीं, कांग्रेस की ओर से यूपी प्रभारी अविनाश पांडे ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बयान दिया और उन पर लगे आरोपों को शर्मनाक बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में ब्राह्मण समाज और धार्मिक गुरुओं का अपमान हो रहा है। इस तरह, एक सामाजिक सम्मेलन सियासी शक्ति प्रदर्शन और विवाद का बड़ा मंच बन गया, जिसकी गूंज प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सुनाई देने की संभावना है।