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दिल्ली में मचे भारी बवाल के बीच मायावती का बड़ा अल्टीमेटम, खोल दिया अंदर का वो राज जिससे हिल गई सत्ता की कुर्सी!

जंतर-मंतर पर जारी बड़े आंदोलन के बीच बीएसपी सुप्रीमो मायावती के एक ट्वीट ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। आखिर मायावती ने सरकारों को ऐसा क्या अल्टीमेटम दे दिया और किन बड़े चेहरों पर कानूनी हंटर चलाने की मांग की है?

जंतर-मंतर

संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का अखाड़ा बन चुका है। चारों तरफ भारी सुरक्षा बल और आंदोलनकारियों के नारों के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बेहद तल्ख पोस्ट साझा करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मायावती ने साफ शब्दों में कहा है कि संसद से लेकर सड़कों तक जो गतिरोध बना हुआ है, उसे पुलिस के दम पर दबाने की बजाय सरकारों को बेहद संवेदनशीलता और समझदारी के साथ बातचीत से सुलझाना चाहिए।

पेपर लीक और सिस्टम के बड़े खिलाड़ियों पर निशाना

मायावती ने अपने बयान में देश के करोड़ों युवाओं के दर्द को आवाज दी है। उन्होंने सीधे तौर पर पेपर लीक, शिक्षा माफिया और ठप पड़े रोजगार के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आज का युवा अगर सड़कों पर बैठने को मजबूर है, तो इसकी जिम्मेदार सरकार की लचर नीतियां हैं। बसपा प्रमुख ने केवल निचले स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई को दिखावा बताते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह चाटने वाले असली और रसूखदार ‘जिम्मेदार लोगों’ पर अभी तक शिकंजा क्यों नहीं कसा गया? उन्होंने मांग की है कि पर्दे के पीछे छिपे इन बड़े मगरमच्छों पर बिना किसी देरी के सबसे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि युवाओं का भविष्य अंधकार में जाने से बचाया जा सके।

युवाओं के टूटते सब्र पर सरकारों को सख्त चेतावनी

इस पूरे मामले में मायावती ने सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि देश के युवाओं के सब्र का इम्तिहान लेना बंद होना चाहिए। सालों तक दिन-रात एक करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को जब सिर्फ धांधली और तारीखें मिलती हैं, तो उनका पूरा परिवार टूट जाता है। शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से व्यापार बन चुकी है और रोजगार के नाम पर युवाओं को सिर्फ वादे मिल रहे हैं। मायावती ने कहा कि इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर तुरंत युवाओं की वास्तविक मांगों को सुनना चाहिए और भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

टकराव का रास्ता छोड़ समाधान निकालने की आखिरी अपील

खबर के इस अंतिम हिस्से में बसपा सुप्रीमो ने लोकतंत्र की दुहाई देते हुए सरकारों को अपनी कार्यशैली बदलने की आखिरी नसीहत दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दमनकारी नीतियों से जनता की आवाज को ज्यादा दिनों तक नहीं रोका जा सकता। जंतर-मंतर पर बने इस तनावपूर्ण माहौल को खत्म करने का एकमात्र रास्ता संवाद है। सरकारों को अहंकार का रास्ता छोड़ प्रदर्शनकारियों के बीच जाना चाहिए और एक ठोस समाधान निकालना चाहिए। मानसून सत्र के बीच मायावती के इस तीखे रुख ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस नसीहत को गंभीरता से लेकर जिम्मेदार लोगों पर कोई बड़ा एक्शन लेती है या फिर यह सियासी घमासान और उग्र रूप धारण करेगा।

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