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CEC ज्ञानेश कुमार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें! सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस, सौरव दास बोले- ‘अब जेल जाने की…’

CEC ज्ञानेश कुमार को मिली कानूनी छूट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सौरव दास के बयान और कांग्रेस की इस्तीफे की मांग से बढ़ा सियासी विवाद। जानिए पूरा मामला।

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CEC ज्ञानेश कुमार

CEC Gyanesh Kumar News: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) से जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ज्ञानेश कुमार को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर चुनाव आयुक्तों को मिली पूर्ण कानूनी छूट असंवैधानिक घोषित होती है तो ज्ञानेश कुमार का ठिकाना जेल हो सकता है। इस बयान के बाद चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने CEC और चुनाव आयुक्तों को क्यों भेजा नोटिस?

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में मिली कानूनी सुरक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। याचिका में संबंधित कानून के तहत दी गई पूर्ण छूट की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित नहीं किया है। अदालत के नोटिस के बाद अब केंद्र और चुनाव आयोग का जवाब इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सौरव दास ने ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप

सुप्रीम कोर्ट के इस कदम पर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान गड़बड़ियां हुई हैं। दास ने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर नए सबूत सामने आए हैं और इससे चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी सुरक्षा खत्म होती है तो ज्ञानेश कुमार को जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि, ये सौरव दास के आरोप और राजनीतिक बयान हैं, सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला नहीं।

मुस्तफाबाद में SIR को लेकर सामने आया विवाद

इस पूरे विवाद में दिल्ली की मुस्तफाबाद विधानसभा सीट का मामला भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 1,021 आवेदन जमा किए गए थे। इनमें से करीब 77 प्रतिशत आवेदनों में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट के रूप में दर्ज लोगों ने फॉर्म-7 दाखिल करने से अपना संबंध होने से इनकार किया। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के अनुरोध के लिए किया जाता है। इस मामले ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। हालांकि, इन आवेदनों से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकती है।

कांग्रेस ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की उठाई मांग

कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अगर गृह मंत्री अमित शाह वास्तव में वोट चोरी के मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहते हैं तो सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग भी उठाई। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को विपक्ष के साथ पहले साझा करने की बात कही। अब इस मामले में सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं।

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