Loksabha Election: NDA या ‘इंडिया’ किसके साथ मायावती करेंगी गठबंधन? खुद बसपा सुप्रीमो ने कर दिया साफ

अब इसी बीच लोकसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाजपार्टी ने एक बैठक की है। जिसमें पशुपत सुप्रीमो मायावती ने संगठन को मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं।

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Mayawati Meeting: इस समय लोकसभा चुनाव को लेकर काफी जोरों से तैयारी चल रही है। सभी पार्टियों अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर रही हैं। अब इसी बीच लोकसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाजपार्टी ने एक बैठक की है। जिसमें पशुपत सुप्रीमो मायावती ने संगठन को मजबूत बनाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान मायावती ने आम चुनाव में गठबंधन को लेकर भी अपना पक्ष एकदम साफ कर दिया है। इस बैठक में मायावती ने संगठन को कदर और छोटी-छोटी बैठकों के आधार पर गांव-गांव में मजबूती बनाने के निर्देश दिए हैं।

गठबंधन पर मायावती ने दिया बड़ा बयान

इस बैठक में मायावती ने कहा कि गठबंधन करने से फायदा होने के बजाय पार्टी को नुकसान ज्यादा उठना पड़ता है। इस बैठक में मायावती ने साफ कर दिया है कि वह कोई भी गठबंधन नहीं करेंगी। पार्टी को अपनी उम्मीदवारों के चैन में सावधानी बरतने के भी निर्देश दिए हैं। लोकसभा चुनाव में पार्टी सभी सीटों पर अपने दम पर चुनाव में उतरेगी। मायावती ने कहा, “गठबंधन की वजह से लाभ के बजाय पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है बसपा का वोट तो स्पष्ट तौर पर गठबंधन वाली दूसरी पार्टी को ट्रांसफर हो जाता है लेकिन दूसरी पार्टियों वोट बसपा उम्मीदवारों को ट्रांसफर नहीं करती। जिससे बसपा के लोगों का मनोबल प्रभावित हो जाता है इसीलिए बस पास सत्ता या विपक्ष दोनों गठबंधनों से दूर रहती है। कांग्रेस की तरह भाजपा की कथनी व करनी में जमीन आसमान का अंतर है।”

महंगाई को लेकर साधा निशान

वहीं मायावती ने कहा, बीजेपी की सरकार में आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया हो गया है। कुछ मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर बाकी सभी लोगों का खासकर बहुजन परिवारों के सामने पालन पोषण की कठिनाई हो रही है। इन सब का प्रभाव आगामी लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा। वहीं कांग्रेस और बीजेपी पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि, बीजेपी आप अपना प्रभावित नहीं बल्कि अपना जनाधार भी खो रही है। इस बार चुनाव देश के राजनीतिक को नई करवट देने वाला साबित होगा। बसपा ने चुनाव को देखते हुए संगठन में कुछ फेरबदल किए हैं। जिसे लेकर मायावती ने कहा,यूपी जैसे बड़े व राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य होने के कारण यहां के राजनीतिक हालत अक्सर बदलते रहते हैं इसीलिए कुछ फेरबदल करने की जरूरत पड़ती है।

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