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शांति समझौते के बाद भी अमेरिका पर भरोसा नहीं! ईरान ने क्यों कहा- ‘दुश्मन हमारे आगे झुकने को…’

US-Iran Peace Deal पर ईरान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान ने अमेरिका पर अविश्वास जताते हुए कहा कि दुश्मन उसके सामने झुकने को मजबूर हुआ। जानिए 19 जून को जेनेवा में होने वाले समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य पर इसका असर।

US-Iran Peace Deal

US-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने का दावा किया है। ट्रंप के इस ऐलान के कुछ ही घंटों बाद तेहरान की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि यह समझौता ईरान की मजबूती और उसकी सैन्य क्षमता का परिणाम है। परिषद ने अपने बयान में दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के पास बातचीत के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते के बावजूद अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं करेगा और उसकी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

ईरान ने समझौते को दिया MoU का नाम

तेहरान ने इस शांति पहल को औपचारिक तौर पर ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU)’ का नाम दिया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, कई महीनों तक चली बातचीत और क्षेत्रीय स्तर पर हुए कूटनीतिक प्रयासों के बाद 14 जून को समझौते को अंतिम रूप दिया गया। जानकारी के अनुसार, इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हो सकते हैं। समझौते के तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने, युद्धविराम को स्थायी बनाने और ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी हटाने पर सहमति बनी है।

ट्रंप ने होर्मुज खोलने और नाकाबंदी हटाने का किया दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पूरी तरह खोलने की मंजूरी दे दी गई है और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को सामान्य बनाने के लिए सभी जहाजों की आवाजाही जल्द शुरू होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में इस मार्ग के खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

समझौते के बावजूद कायम है अविश्वास

हालांकि शांति समझौते की घोषणा के बाद क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, लेकिन ईरान के सख्त रुख ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी बरकरार है। तेहरान का कहना है कि समझौते का मतलब यह नहीं है कि वह अमेरिका को अपना सहयोगी मानने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी समझौते की सफलता केवल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर से तय नहीं होगी, बल्कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के व्यवहार और समझौते की शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर 19 जून को जेनेवा में होने वाले संभावित हस्ताक्षर समारोह पर टिकी हुई है, क्योंकि यही वह दिन होगा जो तय करेगा कि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की शुरुआत बनेगा या फिर यह केवल अस्थायी राहत साबित होगा।

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