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होर्मुज पर ईरान का बड़ा ऐलान, अमेरिका को खुली चुनौती; क्या फिर खुलेगा दुनिया का अहम समुद्री रास्ता?

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के सामने शर्त रखी। जानें ईरान का रुख और भारत के लिए होर्मुज क्यों अहम है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका एक ओर इस क्षेत्र में हथियार पहुंचा रहा है, वहीं दूसरी तरफ समुद्री रास्तों पर रोक लगा रहा है। उन्होंने ईरान के रुख का बचाव करते हुए कहा कि उनका देश अपने ऊपर हुए हमलों का जवाब दे रहा है।

होर्मुज खोलने के लिए रखी बड़ी शर्त

पेजेशकियन के मुताबिक, अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ नाकेबंदी और दूसरी दबाव बनाने वाली गतिविधियां बंद कर देता है, तो तेहरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समुद्री व्यवस्था के तहत काम करने को तैयार है। उन्होंने बताया कि ईरान इस समुद्री रास्ते को लेकर ओमान के साथ एक विशेष समुद्री फ्रेमवर्क पर बातचीत कर रहा था। हालांकि, होर्मुज को दोबारा खोलने का मुद्दा अमेरिकी दबाव खत्म होने से जुड़ा हुआ है।

‘जिंदा हैं तो जवाब देना होगा’

ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके देश को अपने ऊपर हुए हमलों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिका ईरान के इलाके पर हमला कर सकता है और रास्ते रोक सकता है, तो ईरान को चुप क्यों रहना चाहिए। पेजेशकियन ने कहा, “अगर हम जिंदा हैं, तो हमें जवाब देना होगा।” उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों को आम नागरिकों की परेशानियों से जोड़ते हुए बेरोजगारी, गरीबी और इलाज से जुड़ी मुश्किलों का भी जिक्र किया।

भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से होने वाले आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में इस समुद्री रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट से तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है। ईरान इस रास्ते पर अपने नियंत्रण और जहाजों से शुल्क वसूलने के अधिकार की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया है। ओमान भी इस जलडमरूमध्य के दूसरे हिस्से पर नियंत्रण रखता है और बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश कर रहा है।

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