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BRICS से क्यों परेशान है अमेरिका? समिट के बीच सामने आया ऐसा बयान, भारत की रणनीति पर भी उठे सवाल

BRICS Summit 2026 को लेकर अमेरिका में क्यों बढ़ी चिंता? न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में BRICS की एकता, ईरान, चीन और पीएम मोदी की रणनीति पर क्या कहा गया, जानें।

donald trump

BRICS Summit 2026: भारत में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर अमेरिका की चिंता अब उसके प्रमुख मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों में भी दिखाई दे रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में BRICS देशों के बीच बढ़ते सहयोग और पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने की कोशिशों पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन, रूस, भारत और ब्राजील जैसे देश वैश्विक व्यवस्था में पश्चिमी संस्थानों पर निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी वजह से BRICS की गतिविधियों को अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

एकजुटता के बीच युद्ध बनी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में BRICS देशों की एकता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि समूह के सदस्य पश्चिमी प्रभाव का विकल्प तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अलग-अलग देशों के हित कई बार उनके बीच मतभेद पैदा करते हैं। खास तौर पर ईरान और क्षेत्रीय तनाव का असर BRICS की एकजुटता पर पड़ सकता है। ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति को लेकर भी सदस्य देशों के हित हमेशा एक जैसे नहीं हैं। ऐसे में सम्मेलन के दौरान आर्थिक सहयोग के साथ इन मतभेदों को संभालना भी बड़ी चुनौती हो सकती है।

ईरान को लेकर भी अमेरिका की चिंता

ईरान के BRICS में शामिल होने को भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान प्रतिबंधों के बावजूद खुद को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग न दिखाने की कोशिश कर रहा है। वहीं क्षेत्रीय संघर्ष और तेल आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण ऊर्जा सुरक्षा BRICS देशों के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

मोदी के सामने चीन और पश्चिम के बीच संतुलन की चुनौती

BRICS सम्मेलन भारत के लिए भी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने चीन के बढ़ते प्रभाव और पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का जिक्र किया गया है। भारत BRICS का संस्थापक सदस्य होने के साथ अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ भी मजबूत रिश्ते रखता है। ऐसे में नई दिल्ली सम्मेलन के जरिए भारत आर्थिक सहयोग, ग्लोबल साउथ की आवाज और अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।

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