लखनऊ में परिवहन और खनन विभाग की सख्ती के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। हाल ही में किंजल सिंह और भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की निदेशक माला श्रीवास्तव की मौजूदगी में परिवहन मुख्यालय पर अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में यह तय किया गया था कि बकाया चालान और अवैध खनन से जुड़े वाहनों पर दोनों विभाग मिलकर कड़ी कार्रवाई करेंगे। लेकिन कुछ ही दिनों बाद सामने आए एक घटनाक्रम ने इस रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए। खनन विभाग ने एक ऐसे ट्रक को पकड़ा, जिस पर लाखों रुपये के चालान लंबित थे और जिसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा चुका था। बावजूद इसके, परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ सहायक ने उसे बिना उच्च अधिकारियों की अनुमति के छोड़ दिया। मामला सामने आते ही विभाग में हलचल मच गई।
पांच लाख से ज्यादा बकाया, फिर भी मिली रिहाई
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को नौ फरवरी को सूचना मिली थी कि ट्रक संख्या यूपी 71 एटी 0881 महोबा चेक गेट से निकलकर हमीरपुर की ओर जा रहा है। रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि चार दिसंबर 2021 से 26 फरवरी 2022 के बीच इस वाहन पर 11 चालान लंबित थे, जिनकी कुल राशि 5 लाख 50 हजार 400 रुपये थी। खनन अधिकारियों ने सुमेरपुर के पास ट्रक को पकड़ लिया। उस समय ट्रक में गेहूं लदा हुआ था। विभागीय पोर्टल पर यह वाहन ब्लैकलिस्टेड दर्ज था, इसलिए बिना बकाया राशि जमा कराए और सक्षम अधिकारी की अनुमति के इसे छोड़ा नहीं जा सकता था। आरोप है कि आरटीओ कार्यालय कानपुर नगर में तैनात वरिष्ठ सहायक प्रदीप कुमार दीक्षित ने अपने स्तर पर निर्णय लेते हुए ट्रक को रिलीज कर दिया। यह कदम नियमों के विपरीत पाया गया।
नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई: निलंबन और जांच शुरू
मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंची तो इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया। ब्लैकलिस्टेड वाहन को छोड़ना विभागीय आदेशों की अवहेलना समझा गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वरिष्ठ सहायक ने बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के ट्रक को छोड़ा। इसके बाद अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन संजय कुमार ने तत्काल प्रभाव से प्रदीप कुमार दीक्षित को निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्हें मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है और उप परिवहन आयुक्त कानपुर क्षेत्र आर आर सोनी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच अधिकारी पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे।
पुरानी शिकायतें भी चर्चा में, अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर
सूत्रों के मुताबिक, प्रदीप कुमार दीक्षित लंबे समय से कानपुर आरटीओ कार्यालय में तैनात थे और उनके खिलाफ पहले भी कुछ शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि उन शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। इस बार मामला इसलिए अहम हो गया क्योंकि यह संयुक्त विभागीय सख्ती के तुरंत बाद सामने आया है। सरकार अवैध खनन और बकाया चालानों को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी होती है तो यह पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। फिलहाल विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाएगी।