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IAS अफसरों की सादगी भरी शादी ने मचाई चर्चा, कलेक्टरेट में हुई कोर्ट मैरिज… जानिए कैसे शुरू हुई ये अनोखी प्रेम कहानी

यूपी के बरेली में आईएएस अधिकारी अदिति वश्ने और माधव भारद्वाज ने सादगी से कोर्ट मैरिज कर मिसाल पेश की। जानिए उनकी मुलाकात, यूपीएससी रैंक, परिवार और क्यों चर्चा में है यह आईएएस शादी।

 

यूपी के बरेली जिले में उस समय एक अनोखा दृश्य देखने को मिला जब दो युवा आईएएस अधिकारियों ने बिना शोर-शराबे और तामझाम के कोर्ट मैरिज कर ली। आईएएस अधिकारी अदिति वश्ने और माधव भारद्वाज ने जिला कलेक्टरेट में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर विवाह पंजीकृत कराया। आमतौर पर जहां अफसरों की शादियां बड़े होटलों, भव्य रिसॉर्ट या पांच सितारा व्यवस्थाओं के साथ होती हैं, वहीं इस जोड़े ने बेहद सादगी को चुना। विवाह के दौरान सिर्फ परिवार के करीबी सदस्य और कुछ अधिकारी ही मौजूद रहे। न बैंड-बाजा, न बड़ी बारात और न ही भारी भरकम सजावट—सिर्फ जरूरी कानूनी औपचारिकताएं और परिवार का आशीर्वाद। कलेक्टरेट परिसर में हुई इस शादी ने वहां मौजूद कर्मचारियों को भी चौंका दिया। शादी की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई और लोगों ने इसे सादगी की मिसाल बताया।

पहली मुलाकात से विवाह तक की कहानी

अदिति वश्ने और माधव भारद्वाज की मुलाकात सिविल सेवा प्रशिक्षण के दौरान हुई थी। दोनों ने वर्ष 2023 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। प्रशिक्षण के दौरान साथ में पढ़ाई, प्रशासनिक अभ्यास और जिम्मेदारियों की समझ ने दोनों को करीब लाया। धीरे-धीरे दोस्ती ने गहरा रूप लिया और दोनों ने जीवनसाथी बनने का फैसला किया। अदिति मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली हैं और उन्होंने अपने पहले प्रयास में शानदार रैंक हासिल की थी। वहीं माधव भारद्वाज उत्तराखंड के मसूरी से ताल्लुक रखते हैं और वर्तमान में राजस्थान कैडर में सेवाएं दे रहे हैं। प्रशासनिक सेवा की व्यस्त जिंदगी के बीच दोनों ने अपने रिश्ते को समझदारी और परिपक्वता के साथ आगे बढ़ाया। परिवारों की सहमति मिलने के बाद उन्होंने बिना दिखावे के शादी करने का निर्णय लिया।

सादगी क्यों बनी चर्चा का कारण?

आज के दौर में जहां शादियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहां एक आईएएस जोड़े का इतनी सादगी से विवाह करना लोगों को प्रेरित कर रहा है। अदिति और माधव का मानना है कि विवाह दो लोगों और दो परिवारों का संबंध है, न कि प्रदर्शन का माध्यम। सूत्रों के अनुसार, दोनों ने पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का निर्णय लिया और बाद में पारंपरिक रीति-रिवाज से सीमित दायरे में विवाह समारोह आयोजित करने की योजना बनाई है। इस शादी की तस्वीरें सामने आते ही लोगों ने इसे “मिसाल” और “नई सोच” का प्रतीक बताया। कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसे अधिकारी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। प्रशासनिक सेवा में होने के बावजूद दोनों ने यह साबित किया कि पद और प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण जीवन के मूल मूल्य होते हैं।

युवाओं के लिए बना प्रेरणा का संदेश

आईएएस अदिति वश्ने और माधव भारद्वाज की शादी केवल एक निजी आयोजन नहीं रही, बल्कि यह युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश बन गई। दोनों अधिकारियों ने अपने करियर की शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया कि सफलता का अर्थ दिखावा नहीं, बल्कि संतुलन और सरलता है। बरेली और मसूरी दोनों ही जगहों पर उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में सादगी और अनुशासन को प्राथमिकता दी। इस शादी ने यह संदेश दिया कि सामाजिक प्रतिष्ठा के बावजूद सरल जीवन जिया जा सकता है। आने वाले समय में पारंपरिक रीति-रिवाज से सीमित पारिवारिक समारोह की भी संभावना जताई जा रही है। फिलहाल, अलवर की यह कोर्ट मैरिज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे लंबे समय तक याद रखने वाली घटना मान रहे हैं।

 

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