ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद आखिरकार नोएडा अथॉरिटी की नींद खुली है। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद अब प्रशासन ने उस निर्माणाधीन गड्ढे के चारों ओर सीमेंटेड बैरिकेड और लोहे की ग्रिल लगा दी है, जो पहले पूरी तरह खुला हुआ था। यही खुला गड्ढा युवराज की मौत की वजह बना। घने कोहरे और अंधेरे में युवराज को यह अंदाजा ही नहीं हो सका कि आगे सड़क नहीं बल्कि पानी से भरा दलदल है। कार दीवार तोड़ते हुए सीधे गड्ढे में जा गिरी। हादसे के बाद अब प्रशासन सक्रिय जरूर दिख रहा है, लेकिन सवाल यही है कि जब खतरा पहले से था तो सुरक्षा इंतजाम पहले क्यों नहीं किए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते जाग जाता, तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
बैरिकेड, ग्रिल और रिफ्लेक्टर से ढका गया मौत का गड्ढा
अब जिस जगह युवराज की कार गिरी थी, वहां हालात पूरी तरह बदल दिए गए हैं। निर्माणाधीन पानी के गड्ढे को चारों तरफ से बैरिकेड और मजबूत लोहे की ग्रिल से घेर दिया गया है। ग्रिल पर रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं, ताकि रात में या कोहरे के दौरान भी वाहन चालकों को दूर से ही खतरे का अंदाजा हो जाए। जिस इलाके में पहले एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं थी, वहां अब लाइटें लगवा दी गई हैं। साथ ही सड़क पर ब्रेकर भी बनाए गए हैं, ताकि तेज रफ्तार में आने वाले वाहन खुद-ब-खुद धीमे हो जाएं। साफ है कि ये सभी इंतजाम अगर पहले होते, तो युवराज की कार की रफ्तार कम होती और उसे समय रहते आगे के खतरे का संकेत मिल जाता। प्रशासन की ये कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि ये सब कुछ एक मौत के बाद ही किया गया।
लापरवाही की कीमत: एक परिवार का उजड़ा सपना
27 साल के युवराज मेहता की मौत ने प्रशासनिक लापरवाही की भारी कीमत को सामने ला दिया है। युवराज अपने परिवार की उम्मीद था, एक पढ़ा-लिखा इंजीनियर, जो अपने भविष्य और परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहा था। लेकिन अथॉरिटी और बिल्डर की लापरवाही ने उसका जीवन छीन लिया। अगर सड़क पर पर्याप्त रोशनी होती, अगर निर्माण स्थल को पहले ही सुरक्षित किया गया होता, अगर चेतावनी संकेत लगाए गए होते, तो शायद युवराज आज जिंदा होता। उसके परिवार के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द है। देर से जागी अथॉरिटी भले ही अब दूसरे युवराजों को बचाने की बात कर रही हो, लेकिन जो चला गया, वह कभी वापस नहीं आएगा। यही वजह है कि लोग प्रशासन की इस ‘देर से आई समझदारी’ पर गुस्सा जता रहे हैं।
कैसे हुआ था हादसा और क्या हैं आरोप
16 और 17 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात युवराज मेहता अपने गुरुग्राम स्थित दफ्तर से घर लौट रहा था। उस रात ठंड और कोहरा बेहद घना था और सेक्टर 150 के उस हिस्से में पूरी तरह अंधेरा पसरा हुआ था। सड़क पर कोई चेतावनी बोर्ड, कोई बैरिकेड या लाइट नहीं थी। इसी दौरान युवराज की कार दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। आरोप है कि वह कई घंटे तक पानी में फंसा रहा और मदद के लिए पुकारता रहा, लेकिन समय रहते रेस्क्यू नहीं हो सका। बाद में उसकी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि बिल्डर और निर्माण से जुड़े लोगों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की थी। प्लॉट में भारी मात्रा में पानी भरा था और उसे खुला छोड़ दिया गया था। इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में केस दर्ज किया गया है। अब सवाल यह है कि क्या इस कार्रवाई से सिस्टम सुधरेगा या फिर अगला हादसा किसी और नाम के साथ सामने आएगा।
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