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कमरे में घुसा तेंदुआ और सामने थी 18 साल की लड़की! फिर दिखाई ऐसे ही बहादुरी, अब मिलेगी सम्मान

प्रयागराज के झूंसी क्षेत्र में तेंदुए को पकड़ने में अहम भूमिका निभाने वाली 18 वर्षीय साहसी बेटी तनु सिंह को वन विभाग ने सम्मानित किया। तनु की सूझबूझ से तेंदुए को सुरक्षित पकड़ा गया और महीनों से दहशत में जी रहे लोगों को राहत मिली।

प्रयागराज के सराय इनायत और झूंसी इलाके में पिछले करीब पांच महीनों से एक तेंदुआ लोगों के लिए डर का कारण बना हुआ था। यह तेंदुआ कई बार रिहायशी इलाकों में देखा गया और अब तक चार लोगों को घायल भी कर चुका था। रात होते ही गांवों में सन्नाटा छा जाता था और लोग डर के मारे घरों से बाहर निकलने से कतराते थे। इसी बीच जनवरी महीने की एक रात झूंसी के छिबैंया गांव में हालात अचानक बदल गए। तेंदुआ गांव निवासी रतन सिंह के घर में घुस आया। जिस कमरे में तेंदुआ दाखिल हुआ, वहीं उनकी 18 वर्षीय बेटी तनु सिंह सो रही थी। अचानक सामने तेंदुए को देखकर कोई भी घबरा सकता था, लेकिन उस पल तनु ने जो किया, वही पूरे इलाके के लिए राहत की वजह बन गया।

डर पर भारी पड़ी समझदारी, कमरे में किया बंद

तनु सिंह ने बताया कि जब उसकी नींद खुली और सामने तेंदुआ दिखा, तो वह कुछ सेकंड के लिए डर गई थी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने बिना शोर मचाए बहुत समझदारी से कमरे से बाहर निकलकर दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। इसके बाद उसने तुरंत अपने परिवार, स्थानीय पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। तनु की इस सूझबूझ से तेंदुआ कमरे में ही बंद रह गया और किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सका। थोड़ी ही देर में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया गया। जैसे ही तेंदुआ पकड़ा गया, पूरे गांव और आसपास के इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली। महीनों से जो डर लोगों के मन में बैठा था, वह एक साहसी लड़की की वजह से खत्म हो गया।

गणतंत्र दिवस पर मिला सम्मान, बनी मिसाल

तनु सिंह की बहादुरी और समझदारी को देखते हुए वन विभाग ने उसे सम्मानित करने का फैसला किया। गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वन विभाग के प्रभागीय निदेशक अरविंद यादव ने छिबैंया गांव निवासी तनु सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर क्षेत्रीय वन अधिकारी फूलपुर लक्ष्मी कांत दुबे भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि तनु ने जिस साहस और धैर्य का परिचय दिया, वह काबिले-तारीफ है। अगर तनु घबरा जाती या गलत कदम उठाती, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। लेकिन उसके सही फैसले ने न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि पूरे इलाके को बड़े खतरे से बचा लिया। यह सम्मान तनु के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किल हालात में भी समझदारी और हिम्मत दिखाती हैं।

वन्यजीव सुरक्षा में अहम योगदान, अधिकारियों की सराहना

क्षेत्रीय वन अधिकारी लक्ष्मी कांत दुबे ने बताया कि तनु सिंह को यह सम्मान वन्यजीव सुरक्षा में असाधारण साहस और सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दिया गया है। तनु की सतर्कता से वन विभाग को तेंदुआ पकड़ने में बड़ी मदद मिली। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों का सहयोग वन्यजीव प्रबंधन में बेहद जरूरी होता है। इस मौके पर उप क्षेत्रीय वन अधिकारी सत्येंद्र चौधरी और बीट प्रभारी बृजेश यादव को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तनु जैसी जागरूकता और हिम्मत अगर और लोगों में हो, तो मानव और वन्यजीव के बीच होने वाले टकराव को काफी हद तक रोका जा सकता है। आज तनु सिंह पूरे इलाके के लिए साहस, समझदारी और जिम्मेदारी की मिसाल बन चुकी है।

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