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UGC नियमों के खिलाफ आगरा में खून से लिखी गई पीएम मोदी को चिट्ठी, बीजेपी में भी शुरू हुआ विरोध

UGC के नए नियमों के विरोध में आगरा से बीजेपी के पूर्व उपसभापति ने पीएम मोदी को खून से चिट्ठी लिखी। जानें कैसे जनरल कैटेगरी और विपक्षी दल इस नए नियम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

UGC New Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी किए गए नए। नियम ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ ने शिक्षा जगत में विवाद की आग लगा दी है। इस नियम के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के नाम पर कुछ विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं, जिन्हें सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर अनिवार्य कर दिया गया है।

देश के कई राज्यों में छात्र और संगठन इस नियम के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में सवर्ण समाज के लोग UGC कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के रायबरेली और आगरा में स्थानीय लोग और संगठन नेताओं को चूड़ियां भेजने जैसी अनोखी राजनीतिक रणनीति अपनाकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। विरोध के बीच कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गए हैं, जहां जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नियम 3(C) भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है और इससे सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय हो सकता है।

आगरा में BJP नेताओं ने भी विरोध की आवाज उठाई

उत्तर प्रदेश के आगरा में बीजेपी से जुड़े नेताओं ने भी इस नियम के खिलाफ विरोध जताया है। नगर निगम आगरा के पूर्व उपसभापति ने इसे लेकर अनोखी कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को अपने खून से चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में उन्होंने UGC के नए नियमों के संभावित दुष्परिणामों को विस्तार से बताया और तत्काल कानून में संशोधन की मांग की।
पूर्व उपसभापति ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता बढ़ाने के नाम पर कुछ वर्गों को शिक्षा से बाहर करने का प्रयास हो रहा है। उनके अनुसार, यह कदम शिक्षा के अधिकार के खिलाफ है। समाज में असमानता को और बढ़ाएगा। आगरा से उठे इन विरोध के सुरों ने देशभर में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।

विपक्षी दल और छात्र संगठन कर रहे हैं राजनीति का इस्तेमाल

पिछले कुछ हफ्तों में UGC के नए नियम राजनीतिक विवाद का रूप लेने लगे हैं। संसद के बजट सत्र से पहले विपक्ष इसे एक बड़ा मुद्दा बनाने की रणनीति में है। छात्र संगठन, युवा नेता और राजनीतिक पार्टियां इसे लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं।
दिल्ली के कॉलेजों में सवर्ण समाज के छात्रों ने UGC कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। रायबरेली में नेताओं को चूड़ियां भेजने की योजना बन रही है। वहीं कुछ छात्र और संगठन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कानून को असंवैधानिक ठहराने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार नियमों को लेकर भ्रम फैला रही है और जनता को सही जानकारी नहीं दी जा रही।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका और सरकार की प्रतिक्रिया

याचिकाकर्ता का तर्क है कि नए नियम उच्च शिक्षा में समानता के नाम पर कुछ वर्गों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। उनका कहना है कि इस नियम के चलते कुछ छात्र समूह शिक्षा से वंचित हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में नियम 3(C) को मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, UGC नियमों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है और सरकार जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है। शिक्षा मंत्रालय और UGC ने कहा है कि नियम का उद्देश्य केवल समान अवसर सुनिश्चित करना है और किसी भी वर्ग के खिलाफ भेदभाव का इरादा नहीं है। इसके बावजूद आगरा से पीएम तक खून से लिखी गई चिट्ठी और विरोध प्रदर्शन ने देशभर में इस मुद्दे को गर्मा दिया है।

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