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नाबालिग हत्या केस में कांग्रेस सांसद को क्यो किया गया हाउस अरेस्ट? धरने पर बैठने के बाद प्रशासन अलर्ट 

सीतापुर नाबालिग हत्या केस में बड़ा राजनीतिक विवाद, कांग्रेस सांसद राकेश राठौर हाउस अरेस्ट के बाद आमरण अनशन पर बैठे। सपा और कांग्रेस की एंट्री से मामला गरमाया, प्रशासन अलर्ट पर।

Sitapur News

Sitapur News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में 15 अप्रैल को हुई एक नाबालिग लड़की की हत्या का मामला अब गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक तनाव का रूप ले चुका है। इस घटना के बाद इलाके में लगातार गहमागहमी बनी हुई है। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या मानते हुए जांच शुरू की थी, लेकिन बाद में परिजनों की शिकायत के आधार पर हत्या का केस दर्ज किया गया। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, घटना के बाद से गांव और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है, जिसके चलते भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गई है।

कांग्रेस सांसद हाउस अरेस्ट

रविवार को जब कांग्रेस सांसद राकेश राठौर पीड़ित परिवार से मिलने के लिए सीतापुर के कटरिया गांव जाने वाले थे, तभी पुलिस ने उन्हें उनके आवास पर ही रोक दिया। खुफिया इनपुट के आधार पर प्रशासन ने उन्हें “हाउस अरेस्ट” कर दिया। पुलिस का कहना है कि संभावित तनाव को देखते हुए यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया। हालांकि, सांसद ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और अपने घर के बाहर ही आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके इस कदम के बाद प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया।

पुलिस और समर्थकों में तनाव

कांग्रेस सांसद के धरने पर बैठने के बाद मौके पर स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। क्षेत्राधिकारी, एसडीएम और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और सांसद को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़े रहे। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई, जिससे माहौल और गरमा गया। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

विपक्ष और सरकार आमने-सामने

यह पूरा मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। एक ओर समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल पर पहले ही पथराव की घटना हो चुकी है, वहीं अब कांग्रेस की एंट्री ने माहौल और गरमा दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी 29 अप्रैल को पीड़ित परिवार से मिलने की घोषणा की है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार के सदस्यों ने राजनीतिक दलों से अपने घर को राजनीति का केंद्र न बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जब पुलिस ने कार्रवाई कर दी है तो अब राजनीतिक दौरे क्यों किए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले को संवेदनशील स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां प्रशासन हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है।

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