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चंपत राय का बयान दर्ज, क्या अब राम मंदिर केस में और बड़े नाम आएंगे सामने?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने चंपत राय का बयान दर्ज किया है और अनिल मिश्रा समेत अन्य ट्रस्ट पदाधिकारियों से पूछताछ की तैयारी है। जांच तेज होने के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी बढ़ी है।

चंपत राय

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की जांच लगातार तेज होती जा रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार उनसे अभी विस्तृत पूछताछ नहीं की गई है, लेकिन उनके बयान को जांच प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि इस मामले से जुड़े सभी व्यक्तियों के बयान चरणबद्ध तरीके से दर्ज किए जाएंगे ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।

 पूछताछ का दायरा बढ़ा, ट्रस्ट अधिकारियों पर नजर

जांच एजेंसियों के अनुसार आने वाले दिनों में ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इनमें अनिल मिश्रा समेत अन्य नाम शामिल हैं, जिनकी भूमिका को लेकर भी जांच टीम जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि मंदिर में आने वाले दान की गणना की प्रक्रिया क्या थी और इसकी निगरानी कैसे की जाती थी। साथ ही दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों की नियुक्ति और उनकी जिम्मेदारियों की भी जांच की जा रही है। यह पूरा मामला अब केवल चोरी के आरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच की ओर बढ़ गया है।

 चंपत राय की भूमिका और उठते सवाल

सूत्रों के मुताबिक चंपत राय का नाम अभी तक एसआईटी की एफआईआर में दर्ज नहीं है, लेकिन उनकी भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने नैतिक आधार पर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया है, हालांकि इसके बाद भी उनकी भूमिका पर चर्चा बनी हुई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो उनसे दोबारा विस्तृत पूछताछ की जा सकती है। शुरुआती चरण में चंपत राय ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया था, लेकिन अब मामला बढ़ने के बाद सभी पहलुओं की दोबारा जांच की जा रही है।

 राजनीतिक बयानबाजी और जांच पर दबाव

इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विपक्षी दल लगातार सरकार और ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। समाजवादी पार्टी समेत कई दलों ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि जांच में पारदर्शिता की कमी हो सकती है और कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि एसआईटी पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि आगे जांच में कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं।

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