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4 साल की मासूम से हैवानियत के बाद हत्या, कोर्ट ने कहा- ‘फांसी भी कम है’, सुनाई मौत की सजा

पुणे के नसरपुर में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी भीमराव कांबले को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने अपराध को दुर्लभतम श्रेणी का बताते हुए कड़ी टिप्पणी की।

पुणे

महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरपुर में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 65 वर्षीय दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने इस अपराध को समाज को झकझोर देने वाला और अत्यंत जघन्य बताया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराध के लिए उम्रकैद पर्याप्त नहीं है और कानून के दायरे में उपलब्ध सबसे कठोर सजा ही दी जा सकती है। फैसले के दौरान पीड़िता का परिवार भी अदालत में मौजूद रहा और लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई।

 मासूम के साथ दरिंदगी के बाद कर दी थी हत्या

यह घटना मई 2026 में पुणे जिले के भोर तालुका के नसरपुर क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि 65 वर्षीय भीमराव कांबले ने चार साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया और पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया था। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा गवाहों के आधार पर मजबूत चार्जशीट अदालत में पेश की। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई गई ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।

 दोषी करार होने के चार दिन बाद मिली फांसी की सजा

अदालत ने 25 जून को सुनवाई पूरी करने के बाद भीमराव कांबले को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर बहस हुई और 29 जून को कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाते हुए दोषी को फांसी की सजा दी। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जांच से लेकर दोष सिद्ध होने और सजा सुनाए जाने तक की पूरी प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में ऐसे साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए कहा कि यह अपराध समाज के लिए असाधारण रूप से क्रूर और दुर्लभतम श्रेणी का है।

कड़ा संदेश देने वाला फैसला

फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित जांच और समयबद्ध सुनवाई से न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत होता है। हालांकि, कानून के तहत दोषी को उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार रहेगा और आगे की कानूनी प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार चलेगी। इस बीच बच्ची के परिवार ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई होगी।

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