भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। नई जिम्मेदारी के साथ ही लखनऊ और अंडमान-निकोबार के बीच एक दिलचस्प जुड़ाव फिर चर्चा में आ गया है। डॉ. शर्मा का राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन लंबे समय तक लखनऊ से जुड़ा रहा है। उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताया। उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल बनाकर केंद्र शासित प्रदेश के विकास और प्रशासन को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।
लखनऊ से अंडमान तक डॉ. शर्मा का सफर
डॉ. दिनेश शर्मा की पहचान लखनऊ की राजनीति से भी गहराई से जुड़ी रही है। वह वर्ष 2006 से 2017 तक लखनऊ के महापौर रहे। इसके बाद 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली और मार्च 2022 तक उन्होंने इस पद पर काम किया। साल 2023 में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। अब अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल के रूप में उनकी नई भूमिका शुरू होने जा रही है। ऐसे में लखनऊ से निकले एक प्रमुख राजनेता का इस द्वीप समूह का संवैधानिक प्रमुख बनना शहर के लोगों के लिए भी खास चर्चा का विषय बन गया है।
इसी धरती से जुड़ी है शहीद मनोज पांडे की वीरगाथा
अंडमान-निकोबार के साथ लखनऊ का एक और भावनात्मक रिश्ता है। कारगिल युद्ध में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवान मनोज कुमार पांडे का संबंध लखनऊ से था। भारतीय सेना में रहते हुए उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान असाधारण बहादुरी दिखाई थी। उनके अदम्य साहस और बलिदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी स्मृति को सम्मान देने के लिए अंडमान-निकोबार के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। यही वजह है कि डॉ. शर्मा की नई जिम्मेदारी के साथ शहीद मनोज पांडे से जुड़ा यह कनेक्शन भी लोगों का ध्यान खींच रहा है।
दो नाम, एक खास कनेक्शन
एक ओर लखनऊ में लंबे समय तक सक्रिय रहे डॉ. दिनेश शर्मा अब अंडमान-निकोबार की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे, वहीं इसी केंद्र शासित प्रदेश में लखनऊ के वीर सपूत मनोज कुमार पांडे की स्मृति भी मौजूद है। दोनों का जुड़ाव अलग-अलग क्षेत्रों से है, लेकिन अंडमान-निकोबार ने दोनों को एक खास कड़ी में जोड़ दिया है। डॉ. शर्मा के सामने अब इस केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन, विकास और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभालने की चुनौती होगी। उनकी नियुक्ति के बाद लखनऊ से अंडमान तक यह अनोखा रिश्ता सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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