Kannauj News: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष कैश खान एक बार फिर विवादों में आ गए हैं। इस बार उन पर एक बेसहारा गाय पर पालतू कुत्तों से हमला कराने का आरोप लगा है। घटना का कथित सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बादमामला चर्चा में आ गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर कैश खान और उनके सहयोगी जमील खान के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और पुलिस पूरे मामले की सच्चाई पता लगाने में जुटी है।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार यह घटना कन्नौज शहर के बालापीर मोहल्ले की है। शिकायतकर्ता अदील खान ने आरोप लगाया है कि 23 जून की सुबह सड़क पर घूम रही एक बेसहारा गाय को कैश खान और उनके सहयोगी ने घेर लिया। आरोप है कि इसके बाद उनके पालतू कुत्तों को गाय पर छोड़ दिया गया, जिससे गाय गंभीर रूप से घायल हो गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद घायल गाय को एक गेस्ट हाउस परिसर में ले जाकर बंद कर दिया गया। हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।
CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की हो रही जांच
मामले में शिकायतकर्ता का दावा है कि पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। कथित वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने उसे जांच का हिस्सा बना लिया है। अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि घटना के समय क्या हुआ था और आरोप कितने सही हैं। जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी को सौंपी गई है। पुलिस ने साफ किया है कि बिना जांच पूरी किए किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा और कार्रवाई केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
कौन हैं कैश खान, जिनका नाम फिर चर्चा में आया?
कैश खान कन्नौज की स्थानीय राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष रह चुके हैं। राजनीतिक गतिविधियों के अलावा उनका नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार उनके खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं और पिछले वर्ष उन पर जिला बदर की कार्रवाई भी की गई थी। इसके अलावा सरकारी और पुरातत्व विभाग की जमीन पर कथित कब्जे के आरोप भी पहले लग चुके हैं। हालांकि इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चलती रही है। फिलहाल ताजा मामले में पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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