UP Rental Agreement Rules: उत्तर प्रदेश में किराए के मकान, दुकान या गोदाम में रहने अथवा कारोबार करने वालों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किरायेदारी से जुड़े शुल्क को आसान बनाने का फैसला लिया गया। नई व्यवस्था के तहत 10 लाख रुपये तक के सालाना किराए पर तय शुल्क देना होगा। इससे किरायानामा तैयार कराने और उसका पंजीकरण कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो सकती है।
किरायानामे पर सर्किल रेट से शुल्क की व्यवस्था बदली
अब तक मकान, दुकान या गोदाम का किरायानामा बनवाते समय स्टांप शुल्क की गणना सर्किल रेट के आधार पर होती थी। इससे कई लोगों को पंजीकरण के दौरान अपेक्षा से अधिक खर्च उठाना पड़ता था। सरकार ने 10 वर्ष तक की अवधि वाले किरायेदारी या पट्टा विलेखों के लिए शुल्क व्यवस्था में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य किरायेदारों और मकान मालिकों दोनों के लिए प्रक्रिया को कम खर्चीला और आसान बनाना है।
सालाना किराए के हिसाब से तय होगा शुल्क
नई व्यवस्था में सालाना किराए की राशि के आधार पर शुल्क निर्धारित किया गया है। दो लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर 1,000 रुपये शुल्क देना होगा। वहीं, छह लाख रुपये तक के सालाना किराए के लिए 3,000 रुपये और 10 लाख रुपये तक के किराए पर 4,500 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है। इससे किरायानामा बनवाने वालों को शुल्क का पहले से अंदाजा हो सकेगा और अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होने की उम्मीद है।
कैबिनेट ने 23 प्रस्तावों को दी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में किरायेदारी व्यवस्था के अलावा कुल 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करना, खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना और किसानों को आसान दरों पर ऋण उपलब्ध कराना शामिल है। सरकार ने चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 15.172 किलोमीटर बताई गई है और इसकी लागत एक हजार करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
किसानों और पूर्व अग्निवीरों के लिए भी फैसले
बैठक में किसानों को छह प्रतिशत की ब्याज दर पर छह लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इसके लिए यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड की मदद ली जाएगी। इसके अलावा पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने और सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने से जुड़े फैसले भी लिए गए। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य आम लोगों, किसानों, युवाओं और किरायेदारों को राहत देना है।
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