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हूतियों को निशाना बनाने निकली चीनी मिसाइल लक्ष्य से भटकी! रेगिस्तान में गिरी

यमन में चीनी DF-15A बैलिस्टिक मिसाइल के अवशेष मिलने का दावा हुआ है। जानें सऊदी अरब, हूतियों और मिसाइल की कथित विफलता से जुड़ी पूरी कहानी।

चीनी मिसाइल

यमन में हालिया संघर्ष के दौरान एक मिसाइल के अवशेष मिलने से सऊदी अरब और चीन की सैन्य क्षमताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस यानी OSINT विश्लेषकों ने मारीब प्रांत के राघवान जिले में एक मिसाइल का मलबा मिलने का दावा किया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये अवशेष चीन में बनी DF-15A शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के बूस्टर स्टेज जैसे दिखाई देते हैं। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि मिसाइल सऊदी अरब की रॉयल सऊदी स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स ने हूती ठिकानों को निशाना बनाने के लिए दागी थी, लेकिन यह अपने लक्ष्य तक पहुंचने के बजाय यमन के रेगिस्तान में गिर गई।

सऊदी और चीन ने अब तक नहीं की पुष्टि

यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इसे सऊदी अरब की ओर से चीनी DF-15A मिसाइल के युद्ध में पहले ज्ञात इस्तेमाल के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि, अभी तक सऊदी अरब ने आधिकारिक रूप से यह नहीं माना है कि उसके पास ऐसी मिसाइल मौजूद है या उसने इसे यमन में इस्तेमाल किया। चीन और हूती पक्ष की ओर से भी इस घटना पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों के पास DF-15A जैसी मिसाइल होने के प्रमाण नहीं हैं। उनके हथियारों में मुख्य रूप से ईरानी तकनीक से जुड़े मिसाइल सिस्टम और ड्रोन शामिल बताए जाते हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब के पास चीन से खरीदी गई DF-3A और DF-21 मिसाइलों की मौजूदगी की रिपोर्टें पहले से आती रही हैं।

DF-15A की क्षमता और निशाना चूकने का सवाल

DF-15A चीन की डोंग फेंग सीरीज की कम दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे सड़क पर चलने वाले मोबाइल लॉन्चर से दागा जाता है और इसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है। अलग-अलग संस्करणों के आधार पर इसकी रेंज करीब 600 से 900 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह मिसाइल भारी वॉरहेड ले जाने में सक्षम मानी जाती है और इसमें इनर्शियल नेविगेशन के साथ अन्य अपडेट सिस्टम इस्तेमाल किए जा सकते हैं। हालांकि, किसी मिसाइल की वास्तविक क्षमता केवल तकनीकी दावों से तय नहीं होती। रखरखाव, प्रशिक्षण, लॉन्च प्रक्रिया, मौसम और युद्धक्षेत्र की परिस्थितियां भी उसके प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इसी वजह से मिसाइल के रेगिस्तान में गिरने को लेकर तकनीकी खराबी या निशाना चूकने, दोनों संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

घटना से बढ़ सकती है मध्य पूर्व में हथियारों की होड़

विश्लेषकों के मुताबिक, यदि मिसाइल सऊदी अरब की ही थी और लक्ष्य से चूक गई, तो इससे उसकी गुप्त मिसाइल क्षमता और चीनी हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। साथ ही, यमन में बैलिस्टिक मिसाइलों के इस्तेमाल से संघर्ष और ज्यादा गंभीर होने की आशंका भी बढ़ती है। हूती पक्ष इसे सऊदी हमला मानकर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, फिलहाल इस घटना से जुड़े सभी दावे OSINT रिपोर्टों और तस्वीरों पर आधारित हैं। आधिकारिक पुष्टि और अतिरिक्त सबूत मिलने तक इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में मिसाइल के मलबे की जांच और नए सैटेलाइट या वीडियो साक्ष्य सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

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