Sonam Wangchuk: लंबे समय तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को छुट्टी मिल गई है। अस्पताल से बाहर आने के बाद उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि भी उनके साथ मौजूद रहीं। वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए अपने समर्थकों का धन्यवाद किया और कहा कि अब उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है। उन्होंने बताया कि वह दोबारा खाना खा रहे हैं और धीरे-धीरे शरीर में ताकत लौट रही है। राजघाट पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का अहिंसा और शांति का रास्ता आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पहले था। उनका मानना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन से भी बड़े बदलाव संभव हैं।
समर्थकों का जताया आभार, आंदोलन को बताया सफल
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने पूरे आंदोलन के दौरान उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनका आंदोलन नहीं था, बल्कि हजारों लोगों की आवाज थी, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। वांगचुक ने याद दिलाया कि आंदोलन शुरू करने से पहले भी वह राजघाट गए थे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद जंतर-मंतर पहुंचे थे। अब अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने फिर से राजघाट जाकर उसी विचारधारा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि लोगों के सहयोग और विश्वास की वजह से यह अभियान अपने लक्ष्य तक पहुंच सका। उन्होंने सभी समर्थकों से आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से समाज से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहने की अपील की।
#WATCH | Delhi | Activist Sonam Wangchuk, along with his wife Gitanjali Angmo, offers tributes at Rajghat, soon after getting discharged from Medanta Hospital in Gurugram. pic.twitter.com/voNfoVmsyD
— ANI (@ANI) July 27, 2026
लंबे अनशन के बाद बिगड़ी थी तबीयत
सोनम वांगचुक छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन में शामिल हुए थे। वह कई दिनों तक लगातार अनशन पर रहे, जिसके कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में अदालत के निर्देश के बाद उन्हें दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका इलाज चला। डॉक्टरों की निगरानी में रहने के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अस्पताल से निकलने के बाद उन्होंने कहा कि वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं और डॉक्टरों की सलाह का पूरी तरह पालन करेंगे।
आंदोलन खत्म, लेकिन संदेश रहेगा जारी
जिस आंदोलन में सोनम वांगचुक शामिल थे, वह शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चलाया गया था। लंबे समय तक चले इस अभियान के बाद आंदोलन समाप्त हो गया। हालांकि वांगचुक का कहना है कि किसी भी लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि बदलाव लाने के लिए हिंसा नहीं, बल्कि धैर्य, संवाद और अहिंसा का रास्ता अपनाना चाहिए। राजघाट से दिया गया उनका संदेश भी इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अब उनके समर्थकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में वह किन सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं।
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