अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के सबसे व्यस्त और संवेदनशील रूट ‘अदन की खाड़ी’ में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आधुनिक हथियारों से लैस समुद्री लुटेरों ने एक बड़े व्यापारिक जहाज को अपना निशाना बनाने की कोशिश की। यह जहाज कोई और नहीं, बल्कि भारत के लिए बेहद जरूरी माल लेकर आ रहा ‘MV गोल्डन आर्सेनल’ था। समंदर की उफनती लहरों के बीच जैसे ही लुटेरों की नावें इस विशालकाय मर्चेंट शिप के करीब आईं, जहाज पर सवार क्रू मेंबर्स की सांसें थम गईं। इस जहाज पर भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे, जिनकी जान सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई थी। लुटेरों का इरादा जहाज को बंधक बनाकर करोड़ों की फिरौती वसूलने का था, और वे अपने खूनी मंसूबों के साथ जहाज पर चढ़ने की फिराक में थे।
क्रू मेंबर्स की सूझबूझ और ‘सिटाडेल’ का वो सुरक्षा चक्र
जब मौत सामने खड़ी हो, तो घबराने के बजाय सही फैसला लेना ही जिंदगी बचाता है। MV गोल्डन आर्सेनल के चालक दल ने भी ठीक ऐसा ही किया। लुटेरों को अपनी ओर आते देख क्रू मेंबर्स ने बिना वक्त गंवाए खुद को जहाज के सबसे सुरक्षित हिस्से, जिसे ‘सिटाडेल’ (Citadel) कहा जाता है, उसमें लॉक कर लिया। यह एक ऐसा बख्तरबंद कमरा होता है जिसे बाहर से तोड़ना लुटेरों के लिए नामुमकिन जैसा होता है। इस सुरक्षित ठिकाने से चालक दल ने तुरंत आपातकालीन संचार माध्यमों का उपयोग किया और भारतीय नौसेना को अपनी जान खतरे में होने का संदेश भेजा। यह संदेश सीधे अदन की खाड़ी में गश्त कर रहे भारतीय युद्धपोत INS त्रिकंद के पास पहुंचा, जिसके बाद समंदर में एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की स्क्रिप्ट लिखी गई।
समंदर के ‘मगरमच्छ’ MARCOS की एंट्री और लुटेरों का फरार होना
भारतीय नौसेना के वॉरशिप INS त्रिकंद को जैसे ही मदद की गुहार मिली, उसने पूरी ताकत से घटनास्थल की तरफ रुख किया। भारतीय नौसेना की इस हैरतअंगेज और बिजली जैसी तेज रफ्तार कार्रवाई की भनक जैसे ही समुद्री डाकुओं को लगी, उनके हौसले पस्त हो गए। उन्हें अच्छी तरह पता था कि भारतीय नौसेना के जांबाज कमांडो से टकराने का अंजाम क्या होगा। नौसेना के युद्धपोत को अपनी तरफ आता देख लुटेरे उल्टे पैर भाग खड़े हुए। इसके तुरंत बाद, भारतीय नौसेना के सबसे खतरनाक और घातक विशेष मरीन कमांडो, जिन्हें ‘MARCOS’ कहा जाता है, उन्होंने ऑपरेशन की कमान संभाली। मार्कोस कमांडो आधुनिक हथियारों के साथ हवा और पानी के रास्ते जहाज पर उतरे और पूरे शिप को अपने नियंत्रण में ले लिया।
चप्पे-चप्पे की तलाशी और सुरक्षित सफर की नई शुरुआत
जहाज पर कदम रखते ही मार्कोस कमांडो ने पूरे हिस्से को चारों तरफ से घेर लिया। चूंकि लुटेरे भाग चुके थे, लेकिन फिर भी किसी भी तरह के छुपे हुए खतरे या बारूद की आशंका को खत्म करने के लिए कमांडो ने ‘सर्च एंड क्लियर’ ऑपरेशन चलाया। जहाज के इंजन रूम से लेकर डेक और केबिन तक की गहन तलाशी ली गई। जब यह पूरी तरह सुनिश्चित हो गया कि जहाज पर अब कोई खतरा नहीं है और सभी लुटेरे भाग चुके हैं, तब सिटाडेल में बंद क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस सफल और सूझबूझ से भरे ऑपरेशन के बाद भारतीय नौसेना ने जहाज को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया और उसे अपनी आगे की यात्रा के लिए रवाना कर दिया। नौसेना की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिंद महासागर और उसके आसपास के इलाकों में भारत ही असली ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ है।
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