Bengaluru New: NIA का नाम लेकर किए गए एक बड़े साइबर फ्रॉड ने सभी को चौंका दिया है। बेंगलुरु में रहने वाली 78 साल की एक बुजुर्ग महिला इस ठगी का शिकार हो गईं। बताया जा रहा है कि महिला को एक कॉल आया, जिसमें सामने वाले ने खुद को NIA का अधिकारी बताया। कॉल करने वाले ने महिला को किसी गंभीर मामले में फंसने का डर दिखाया और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का हवाला देकर उन्हें मानसिक रूप से दबाव में डाल दिया। डर और घबराहट में महिला ने कुछ ही घंटों में 38 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
डर का फायदा उठाकर की गई ठगी
ठगों ने महिला को यह यकीन दिलाया कि उनका नाम किसी गैरकानूनी गतिविधि में सामने आया है और जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि अगर तुरंत सहयोग नहीं किया गया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। इस दौरान महिला को लगातार फोन पर रखा गया, ताकि वह किसी और से संपर्क न कर सके। इस तरह के मामलों में ठग पीड़ित को पूरी तरह मानसिक दबाव में ले आते हैं, जिससे वह सही-गलत का फर्क नहीं कर पाता। यही वजह रही कि महिला ने बिना किसी पुष्टि के इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।
साइबर क्राइम का नया तरीका बना खतरा
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे स्कैम आजकल तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें ठग खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं। खासकर बुजुर्ग लोग इस तरह के फ्रॉड का आसान निशाना बनते हैं, क्योंकि वे तकनीकी मामलों में ज्यादा सतर्क नहीं होते। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें और इस तरह की धमकियों को गंभीरता से लेने से पहले संबंधित एजेंसी से पुष्टि जरूर करें।
पुलिस जांच में जुटी, लोगों को चेतावनी
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में तुरंत शिकायत करना बेहद जरूरी है, ताकि पैसे की रिकवरी की संभावना बढ़ सके। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि साइबर ठग कितने चालाक तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए सतर्क रहना और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज से बचना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
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