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तमिलनाडु की सत्ता का सस्पेंस: क्या थिरुमावलवन की ‘डिप्टी सीएम’ वाली शर्त मानेंगे विजय? शाम 4 बजे होगा फैसला

तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस! अभिनेता विजय की पार्टी TVK से गठबंधन के लिए VCK ने रखी उपमुख्यमंत्री पद की शर्त। क्या थिरुमावलवन बनेंगे डिप्टी सीएम? जानें पूरी राजनीतिक उठापटक।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में सत्ता की कुर्सी को लेकर रस्साकशी तेज हो गई है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (TVK) बहुमत के बेहद करीब तो पहुंच गई है, लेकिन जादुई आंकड़े से 10 सीट दूर होने के कारण अब गठबंधन की राजनीति का दौर शुरू हो चुका है। इस बीच, थोल थिरुमावलवन के नेतृत्व वाली विदुथलाई चिरुथाइगल काची (VCK) ने समर्थन देने के बदले ऐसी शर्तें रख दी हैं, जिसने विजय की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शुक्रवार शाम हुई VCK की उच्चस्तरीय डिजिटल बैठक में सरकार में बड़ी हिस्सेदारी और रसूखदार पदों को लेकर लंबी चर्चा हुई, जिसके बाद अब सबकी निगाहें शनिवार शाम 4 बजे होने वाले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हैं।

सत्ता की चाबी और ‘डिप्टी सीएम’ की कुर्सी का खेल

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, VCK ने समर्थन के बदले सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री पद की मांग की है। पार्टी चाहती है कि उसके प्रमुख थोल थिरुमावलवन को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। केवल पद ही नहीं, बल्कि पार्टी अपने नवनिर्वाचित विधायकों के लिए कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की भी दावेदारी ठोक रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि VCK इस बार केवल ‘बाहरी समर्थन’ देने के मूड में नहीं है, बल्कि वह सरकार के भीतर रहकर सत्ता की मलाई और नीति निर्धारण में अपनी मजबूत भूमिका चाहती है। शुक्रवार की बैठक में पार्टी के भीतर इस बात पर सहमति बनी है कि बिना सम्मानजनक हिस्सेदारी के TVK को समर्थन देना जल्दबाजी होगी।

विजय की सीट और तिरुचिरापल्ली का समीकरण

एक और दिलचस्प मोड़ विजय की विधानसभा सीटों को लेकर आया है। चर्चा है कि यदि विजय तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा सीट को छोड़ने का फैसला करते हैं, तो VCK चाहती है कि वहां से थोल थिरुमावलवन चुनाव लड़कर सदन में पहुंचें। वहीं विजय के चेन्नई की पेरम्बूर सीट को अपने पास रखने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही, VCK ने सामाजिक न्याय के मुद्दों को भी मेज पर रखा है। पार्टी ने शर्त रखी है कि पिछली सरकार द्वारा जातीय हत्याओं की जांच के लिए गठित आयोगों को जारी रखा जाए और सरकारी नौकरियों में दलित समाज के लिए पदोन्नति में आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। ये शर्तें विजय के लिए वैचारिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती हैं।

‘ऑपरेशन लोटस’ का डर और कांग्रेस की बाड़ाबंदी

तमिलनाडु में जारी इस सियासी अनिश्चितता के बीच कांग्रेस भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। किसी भी तरह की ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ या विधायकों की खरीद-फरोख्त से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों को आनन-फानन में हैदराबाद भेज दिया है। पार्टी को डर है कि बहुमत के करीब खड़ी TVK या अन्य विरोधी दल उनके विधायकों को तोड़ सकते हैं। याद दिला दें कि 23 अप्रैल को हुए चुनाव में विजय की TVK ने 108 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन 118 के बहुमत के आंकड़े से वह अभी भी 10 सीट पीछे है। ऐसे में कांग्रेस, CPI, CPM और VCK का रुख ही राज्य की अगली सरकार का भविष्य तय करेगा।

शाम 4 बजे का इंतजार: क्या सुलझेगी गुत्थी?

VCK के प्रवक्ता के.के. पावलन ने साफ कर दिया है कि गठबंधन और समर्थन पर अंतिम फैसला थिरुमावलवन खुद लेंगे। शनिवार शाम 4 बजे होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ हो जाएगा कि क्या विजय, VCK की ‘डिप्टी सीएम’ वाली शर्त को स्वीकार करते हैं या राज्य में एक बार फिर किसी नए राजनीतिक समीकरण का जन्म होगा। तमिलनाडु की जनता की सांसें अटकी हुई हैं क्योंकि यह न केवल एक नई सरकार के गठन का सवाल है, बल्कि सुपरस्टार विजय के राजनीतिक करियर की पहली सबसे बड़ी परीक्षा भी है। अगर आज बात नहीं बनी, तो तमिलनाडु में सरकार बनाने का सस्पेंस और लंबा खिंच सकता है।

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