उत्तर प्रदेश के चर्चित रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़कर अब चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का दामन थाम लिया है। उन्होंने यह कदम भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में उठाया। इस राजनीतिक बदलाव के बाद राज्य की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में उनकी भूमिका अहम हो सकती है।
कौन हैं IPS प्रेम प्रकाश, जिनका रहा है लंबा प्रशासनिक करियर
प्रेम प्रकाश 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं और मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। उन्होंने बीटेक की पढ़ाई के बाद पुलिस मैनेजमेंट में भी विशेषज्ञता हासिल की थी। अपने करियर में वह लखनऊ के डीआईजी, आगरा और मुरादाबाद के एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनकी पहचान एक कड़क और सख्त अफसर के रूप में रही है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले और उन्होंने कानून-व्यवस्था से जुड़े कई बड़े अभियानों का नेतृत्व किया।
राजनीतिक सफर: BSP से जुड़ाव, फिर BJP और अब नई पारी
प्रेम प्रकाश का राजनीतिक और प्रशासनिक जुड़ाव पहले भी चर्चा में रहा है। वे कभी बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती के करीबी माने जाते थे और दलित समुदाय से आते हैं। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी, जहां उन्होंने कहा था कि उन्हें देश सेवा का अवसर मिला है। अब उन्होंने BJP से अलग होकर चंद्रशेखर आजाद की पार्टी को चुना है, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके इस कदम को दलित वोट बैंक की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
चुनाव लड़ने की अटकलें तेज, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की नई भूमिका पर नजर
आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रेम प्रकाश आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं। अपने कार्यकाल में उन्होंने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में भी पहचान बनाई थी और दावा किया जाता है कि उन्होंने 67 अपराधियों को एनकाउंटर में पकड़ा या निष्प्रभावी किया। 2019 के CAA-NRC आंदोलन के दौरान भी उनकी भूमिका अहम रही थी। अब उनके राजनीतिक प्रवेश से उत्तर प्रदेश की सियासत में एक नया समीकरण बनता नजर आ रहा है।
