देश में बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी के किचन का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ दिनों से दाल और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने के बाद अब खाने के तेल की कीमतों में बेतहाशा तेजी देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश से लेकर देश के तमाम बड़े महानगरों तक सरसों का तेल, पाम ऑयल, मूंगफली और सूरजमुखी का तेल आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। स्थानीय बाजारों में थोक और फुटकर कीमतों में आए भारी उछाल के कारण लोगों को अब दो वक्त की रोटी पकाने के लिए भी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश और प्रमुख महानगरों में क्या है ताजा स्थिति?
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर, जौनपुर और आसपास के जिलों में इस समय सरसों 7,000 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है, जिसे देखकर किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह 8,000 रुपये के आंकड़े को भी छू सकती है। वहीं, फुटकर बाजारों में सरसों का तेल लगभग 220 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकने लगा है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश भर में सरसों के तेल की औसत खुदरा कीमत करीब 197 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जहां कीमतें 210 से 247 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं।
पाम और सूरजमुखी तेल में भी भारी उछाल, बारिश और सप्लाई का असर
केवल सरसों का तेल ही नहीं, बल्कि अन्य खाद्य तेलों के दाम में भी जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाम ऑयल के दाम में पिछले एक साल के दौरान करीब 14 प्रतिशत की तेजी आई है और यह लगभग 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसके अलावा, सूरजमुखी का तेल करीब 19 प्रतिशत महंगा होकर 191 रुपये प्रति किलोग्राम और मूंगफली का तेल करीब 205 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जानकारों का मानना है कि इस बार लगातार बारिश की वजह से आपूर्ति (Supply) पर बुरा असर पड़ा है और इस मौसम में अक्सर खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही, सब्जियों के दामों में भी इजाफा होने से महंगाई का ग्राफ और ऊपर चला गया है।
राहत की कोई उम्मीद नहीं: कब थमेगी कीमतों की रफ्तार?
लगातार बढ़ रही कीमतों ने यह साबित कर दिया है कि निकट भविष्य में रसोई के मोर्चे पर राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नजर नहीं आ रही है। स्थानीय बाजारों और मंडियों में सप्लाई चेन बाधित होने के कारण खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि जब तक थोक मंडियों में आवक में सुधार नहीं होता, तब तक कीमतों में नरमी आने की संभावना बेहद कम है। आम उपभोक्ता अब सरकार से यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेलों और सब्जियों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कुछ कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि हर घर की रसोई का बजट संभल सके।
