मुजफ्फरनगर में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के तहत नगर कोतवाली पुलिस को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध कार को रोककर उसमें सवार तीन शातिर तस्करों को धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ और तलाशी के दौरान बदमाशों के कब्जे से जो सामान बरामद हुआ, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। आरोपियों के पास से चार आधुनिक पिस्टल, छह तमंचे 315 बोर और एक 12 बोर का तमंचा समेत कुल 11 अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। इसके अलावा हथियारों की ढुलाई में इस्तेमाल की जा रही कार, एक बाइक, कई मोबाइल फोन और नकदी भी जब्त की गई है।
बिहार के मुंगेर से जुड़े हैं तार, मेरठ के रास्ते होती थी तस्करी
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह पूरा गिरोह बिहार के कुख्यात हथियार निर्माण केंद्र मुंगेर से अवैध असलहे बेहद कम दामों में खरीदकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सप्लाई करता था। आरोपी मुंगेर से करीब 20 से 25 हजार रुपये प्रति हथियार के हिसाब से माल खरीदते थे और फिर उसे स्थानीय अपराधियों या गैंग्स को दो से तीन गुना ऊंची कीमत पर बेचते थे। वे पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए मेरठ के रास्ते का इस्तेमाल करते थे ताकि आसानी से मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हथियारों की डिलीवरी दी जा सके।
हरिद्वार, सहारनपुर, शामली और गाजियाबाद तक फैला था नेटवर्क
जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह अवैध हथियारों का नेटवर्क सिर्फ मुजफ्फरनगर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसका दायरा कई अन्य जिलों और पड़ोसी राज्य तक फैला हुआ था। मुजफ्फरनगर के अलावा ये तस्कर हरिद्वार, सहारनपुर, शामली और गाजियाबाद जैसे संवेदनशील जिलों के अपराधियों को भी हथियारों की आपूर्ति करते थे। एसएसपी मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों की पहचान नितेश सैनी, समीर और उमंग के रूप में हुई है। इनमें से कुछ बदमाशों का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है और वे पहले भी जेल की हवा खा चुके हैं, जिससे साफ होता है कि वे लंबे समय से इस अवैध कारोबार में सक्रिय थे।
संगीन धाराओं में केस दर्ज, पुलिस कर रही आगे की कानूनी कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन द्वारा अपराध पर नियंत्रण पाने के लिए अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इन सभी आरोपियों के खिलाफ थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध आयुध अधिनियम (Arms Act) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया है। पुलिस अब इस बात की भी गहराई से छानबीन कर रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं और वे उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड में किन-किन को हथियार बेचते थे। सभी आरोपियों को नियमानुसार अदालत में पेश कर जेल भेजने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
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