कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपने प्रवक्ता विजेता दहिया (Vijeta Dahiy) को पद से हटा दिया है। पार्टी ने यह फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो और हाल ही में हुए ‘संसद चलो’ आंदोलन में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर लिया। वायरल वीडियो में विजेता दहिया बर्गर खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया, जब पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे थे। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठने लगे, जिसके बाद पार्टी ने आधिकारिक कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया।
पार्टी ने बताया असंवेदनशील व्यवहार
CJP ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए बयान जारी कर कहा कि विजेता दहिया का व्यवहार पार्टी के सिद्धांतों और आंदोलन की भावना के अनुरूप नहीं था। पार्टी का कहना है कि जब प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे थे, उसी दौरान इस तरह का वीडियो सामने आना बेहद असंवेदनशील माना गया। बयान में कहा गया कि किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से ऐसे व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसी वजह से उन्हें प्रवक्ता पद से हटाने के साथ-साथ उनकी सभी आधिकारिक जिम्मेदारियां भी तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई हैं।
We strongly condemn the deeply insensitive actions of our spokesperson Vijeta Dahiya, whose videos surfaced while peaceful protestors and our team were facing brutal police violence. Such conduct is unacceptable, shows a complete lack of judgment, and is wholly inconsistent with…
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 21, 2026
संसद मार्च में शामिल न होने पर भी उठे सवाल
पार्टी के भीतर विजेता दहिया को लेकर एक और मुद्दा चर्चा में रहा। उन पर आरोप लगाए गए कि वह 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक दिल्ली पहुंचे थे, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ। ऐसे समय में पार्टी के एक प्रमुख चेहरे की अनुपस्थिति को लेकर संगठन के अंदर भी नाराजगी बताई जा रही थी। हालांकि, इस मामले में विजेता दहिया की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने पार्टी के फैसले को स्वीकार किया है या नहीं।
सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
विजेता दहिया को हटाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए इसे अनुशासन बनाए रखने की दिशा में जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि दहिया को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए था। फिलहाल CJP ने साफ कर दिया है कि संगठन की प्राथमिकता आंदोलन और उसके मूल सिद्धांत हैं तथा किसी भी पदाधिकारी से जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विजेता दहिया आगे इस पूरे विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और पार्टी भविष्य में उनकी भूमिका को लेकर कोई नया फैसला करती है या नहीं।
