उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए उनके एक वीडियो और जातीय टिप्पणी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, जिस पर अब उन्होंने खुलकर अपनी सफाई दी है। पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय या जाति विशेष को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि समाज में फैल रही नफरत और वैमनस्य पर अपनी नाराजगी जाहिर करना था। उन्होंने अपने जीवन से जुड़ा एक ऐसा वाकया साझा किया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।
सामाजिक सौहार्द और व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र
अपने ऊपर लगे जातीय टिप्पणी के आरोपों पर सफाई देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए समाज में जानबूझकर जातीय वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके बचपन से लेकर आज तक के सफर में लगभग हर जाति और वर्ग का सहयोग और एहसान रहा है। पूर्व सांसद ने अपने अतीत का एक मार्मिक संस्मरण साझा करते हुए बताया कि एक बार गोंडा में उन पर मुसलमानों द्वारा गोली चलाई गई थी। उस दौरान हालात इतने तनावपूर्ण थे कि पुलिस प्रशासन ने रास्ते बंद कर दिए थे और उनके परिवार का कोई भी सदस्य समय पर उन तक नहीं पहुंच पाया था।
अस्पताल पहुंचाने से लेकर सुरक्षा तक की कहानी
गोंडा में हुए उस जानलेवा हमले को याद करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि जब वे खून से लथपथ थे, तब अस्पताल पहुंचाने वाले सबसे पहले व्यक्ति ‘लाल कालिया’ थे, जिन्हें ‘यूनुस’ के नाम से भी जाना जाता है और वे एक मुसलमान थे। उन्होंने हैरान करने वाली बात बताते हुए कहा कि गोली चलाने वाला भी एक मुसलमान था और उनकी जान बचाने वाला शख्स भी मुस्लिम ही था। अगली रात जब हमले के डर से उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, तो वहां के स्थानीय लोगों ने पूरी रात जागकर उनकी सुरक्षा की थी। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग आए हैं, इसलिए किसी एक घटना या वर्ग को लेकर नकारात्मकता फैलाना सही नहीं है।
विपक्षी दलों और राहुल गांधी पर तीखा हमला
सिर्फ अपनी सफाई तक ही सीमित न रहते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार देश की संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग पर बेबुनियाद सवाल उठा रहा है, जो देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व सांसद ने कहा कि जब से कांग्रेस की कमान राहुल गांधी के हाथों में आई है, तब से पार्टी के आसपास वामपंथी विचारधारा के लोग हावी हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि विपक्ष को कोई कानून बदलना है, तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं या जनता के बीच चुनकर आएं, लेकिन बांग्लादेश की तर्ज पर देश की व्यवस्था पर दबाव बनाने की रणनीति कामयाब नहीं होगी।
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