महाराष्ट्र के पुणे से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। पुणे की एक अदालत ने 4 साल की मासूम बच्ची के साथ गलत काम करने और उसकी जान लेने वाले आरोपी भीमराव कांबले को दोषी माना है। जब कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी, तो माहौल बहुत गंभीर था। जज एस आर सालुंखे ने 65 साल के दोषी भीमराव को सामने बुलाया और पूछा, “अब तुम ही बताओ, तुम्हें क्या सजा मिलनी चाहिए?” इस सवाल पर आरोपी के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था। वह कोर्ट को गुमराह करने के लिए अपनी ही एक झूठी कहानी सुनाने लगा और कहा कि उसने कुछ नहीं किया। इस पर जज ने उसे तुरंत टोका और कहा कि तुम्हारा गुनाह साबित हो चुका है, अब बस सजा पर बात करो। इसके बाद आरोपी चुप हो गया।
सिर्फ ढाई महीने में आया फैसला: वकील ने मांगी फांसी की सजा
यह मामला महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे तेजी से सुलझने वाले मामलों में से एक बन गया है। घटना के सिर्फ ढाई महीने के भीतर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सरकारी वकील मिलिंद पवार ने बताया कि पूरी सुनवाई के दौरान इस बुजुर्ग आरोपी के चेहरे पर अपनी इस घिनौनी हरकत के लिए कोई दुख या अफसोस नहीं दिखा। कानून के मुताबिक, आरोपी को जिन धाराओं में दोषी पाया गया है, उनमें फांसी और उम्रकैद जैसी बड़ी सजाएं शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट ने अभी आखिरी सजा का ऐलान नहीं किया है। दोनों पक्षों की बची हुई बातचीत पूरी होने के बाद सजा सुनाई जाएगी। सरकारी वकील ने कोर्ट से मांग की है कि ऐसे इंसान को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
वकील की दलील और आरोपी का पुराना इतिहास
अदालत में आरोपी के वकील ने उसे बचाने की कोशिश करते हुए कहा कि घटना की कुछ बातें आपस में मेल नहीं खाती हैं। वकील ने यह भी कहा कि आरोपी की उम्र 65 साल है, इसलिए उसकी उम्र को देखते हुए उसे फांसी के बजाय उम्रकैद की सजा दी जाए। दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने इस बात का विरोध किया और बताया कि इस आदमी का रिकॉर्ड पहले से ही खराब है। यह उसका पहला अपराध नहीं है, बल्कि वह पहले भी दो बार ऐसे मामलों में पकड़ा जा चुका है, लेकिन सबूत न होने के कारण बच गया था। आरोपी की हरकतें इतनी खराब थीं कि उसका खुद का परिवार भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया।
क्या थी वो खौफनाक घटना? जिसने पूरे राज्य को हिला दिया
यह पूरी घटना 1 मई को पुणे के नसरपुर गांव में हुई थी। 4 साल की एक मासूम बच्ची गर्मी की छुट्टियां बिताने अपनी नानी के घर आई हुई थी। दोपहर के समय जब वह घर के बाहर खेल रही थी, तभी पड़ोस में रहने वाला 65 साल का भीमराव कांबले उसे बहला-फुलाकर एक गौशाला में ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ गलत काम किया और फिर पकड़े जाने के डर से पत्थर से कुचलकर उसकी जान ले ली। उसने बच्ची के शव को गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया था। जब घरवालों ने बच्ची को ढूंढा और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज देखी, तो आरोपी बच्ची का हाथ पकड़कर ले जाता हुआ दिखाई दिया। इसके बाद गुस्से में आए गांव वालों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था। अब पूरे गांव और राज्य को कोर्ट के आखिरी फैसले का इंतजार है।
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