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रिलीज से एक दिन पहले बड़ा झटका! ‘द केरल स्टोरी 2’ पर हाईकोर्ट की रोक, क्या अब सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत?

‘द केरल स्टोरी 2’ की 27 फरवरी 2026 की रिलीज पर केरल हाईकोर्ट ने 13 दिनों की अंतरिम रोक लगाई। सर्टिफिकेशन पर उठे सवाल, मेकर्स सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील।

बहुप्रतीक्षित फिल्म The Kerala Story 2 को रिलीज से ठीक पहले कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ा है। 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में आने वाली इस फिल्म पर Kerala High Court ने 13 दिनों की अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले ने फिल्म के निर्माताओं को बड़ा झटका दिया है, क्योंकि देशभर में एडवांस बुकिंग और अंतरराष्ट्रीय रिलीज की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। अब मेकर्स ने साफ किया है कि वे इस आदेश को चुनौती देते हुए Supreme Court of India का दरवाजा खटखटाएंगे।

हाईकोर्ट का सख्त रुख: सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

फिल्म की रिलीज पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट ने Central Board of Film Certification की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रमाणन देते समय जरूरी दिशा-निर्देशों का पूरा पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सामाजिक सौहार्द और संवेदनशील विषयों से जुड़े मामलों में सर्टिफिकेशन अधिक सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने कहा कि यह समझ से परे है कि फिल्म को ‘यू/ए’ सर्टिफिकेट कैसे दे दिया गया, जबकि इसके विषय को देखते हुए अधिक सख्त वर्गीकरण पर विचार किया जा सकता था। अदालत ने 13 दिनों की अंतरिम रोक लगाते हुए निर्देश दिया कि इस अवधि में फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग न हो। साथ ही, सीबीएफसी और निर्माताओं को सुनिश्चित करने को कहा गया कि आदेश का पालन किया जाए।

मेकर्स का पलटवार: ‘सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील’

फिल्म के निर्माता विपुल शाह ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इस आदेश से निराश हैं और इसे चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उनके अनुसार, फिल्म को विधिवत सर्टिफिकेट मिलने के बाद रिलीज की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। देश-विदेश में वितरण समझौते हो चुके हैं और थिएटर स्लॉट तय किए जा चुके हैं। ऐसे में अंतिम समय पर रोक लगना आर्थिक और पेशेवर दृष्टि से बड़ा झटका है।

निर्माताओं का कहना है कि फिल्म किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं बनाई गई है। वे अदालत में यह दलील रखेंगे कि फिल्म अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती है और इसे दर्शकों के सामने आने दिया जाना चाहिए। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की संभावित सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि फिल्म तय तारीख के आसपास रिलीज हो पाएगी या नहीं।

बहस तेज: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम सामाजिक सौहार्द

इस पूरे मामले ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। कुछ लोग अदालत के फैसले को एहतियाती कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे रचनात्मक स्वतंत्रता पर अंकुश मान रहे हैं। फिल्म के समर्थकों का कहना है कि किसी भी फिल्म को देखने या न देखने का फैसला दर्शकों पर छोड़ देना चाहिए। वहीं विरोध करने वाले समूहों का तर्क है कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों का असर व्यापक हो सकता है, इसलिए सावधानी जरूरी है।

फिलहाल 13 दिनों की रोक लागू है और इस दौरान फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं की जाएगी। यदि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है तो रिलीज की नई तारीख सामने आ सकती है। अन्यथा, मेकर्स को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ सकता है। यह मामला आने वाले दिनों में फिल्म उद्योग और कानूनी हलकों में चर्चा का केंद्र बना रहेगा।

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