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PoK में आधी रात को अचानक क्यों काटी गई बिजली और इंटरनेट? भारत की एक चेतावनी ने उड़ा दी पाकिस्तानी सेना की नींद!

PoK में भड़की विद्रोह की आग! मुनीर सेना की बर्बरता के बीच भारत ने दुनिया के सामने खोला पाकिस्तान का काला चिट्ठा। इंटरनेट ब्लैकआउट और नरसंहार की खौफनाक दास्तान, जिसने हिला दिया अंतरराष्ट्रीय मंच।

PoK

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात पूरी तरह काबू से बाहर हो चुके हैं। दशकों से जारी अन्याय, गरीबी और बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रही PoK की जनता का गुस्सा अब एक बड़े जन-आक्रोश में बदल गया है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट, पूंछ, मीरपुर और नीलम घाटी जैसी खूबसूरत वादियां इस समय गोलियों की गूंज और चीख-पुकार से दहल उठी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं। चारों तरफ सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, लेकिन यह सन्नाटा किसी शांति का नहीं, बल्कि खौफ का है। आधी रात को अचानक मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, ताकि वहां चल रहे दमन की तस्वीरें और वीडियो दुनिया के सामने न आ सकें। इस अचानक हुए डिजिटल ब्लैकआउट ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है कि बंद दरवाजों के पीछे कुछ बहुत बड़ा और भयानक घटित हो रहा है, जिसे दुनिया से छिपाने की पूरी कोशिश की जा रही है।

भारत का तीखा प्रहार और बेनकाब होता पाकिस्तान

इस पूरे घटनाक्रम पर नई दिल्ली की नजरें लगातार बनी हुई हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को पूरी तरह बेपर्दा कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे तौर पर कहा कि PoK में पुलिस और सुरक्षाबलों की ओर से की जा रही बर्बरता बेहद गंभीर है। भारत ने आंकड़ों और सबूतों के साथ दुनिया को बताया कि कैसे वहां निर्दोष नागरिकों की आवाज को बंदूकों के दम पर कुचला जा रहा है। भारत ने पाकिस्तान के उस पुराने पैंतरे को भी बेअसर कर दिया, जिसके तहत वह हमेशा अपनी कमियों को छिपाने के लिए भारत के खिलाफ फर्जी वीडियो और मनगढ़ंत खबरें (Fake Narrative) फैलाता है। भारतीय राजनयिकों ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान अब अपनी आंतरिक विफलताओं, टूटती अर्थव्यवस्था और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन से दुनिया का ध्यान नहीं भटका सकता। भारत की इस दोटूक चेतावनी ने इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया है।

27 मौतें, 200 घायल और ‘मुनीर सेना’ का खूनी खेल

जमीन से आ रही छिटपुट खबरें और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट जो बयां कर रही हैं, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के इशारे पर काम कर रही ‘मुनीर सेना’ ने हक की मांग कर रहे निहत्थे नागरिकों पर सीधा हमला बोल दिया है। हिंसक झड़पों में अब तक लगभग 27 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि मरने वालों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि अस्पतालों पर भी सेना का कड़ा पहरा है और घायलों को इलाज मिलने में दिक्कतें आ रही हैं। PoK की जनता जो कभी केवल आटे, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही थी, उसे पाकिस्तानी हुकूमत ने बागी घोषित कर दिया है। हवा में तैरती आंसू गैस के गोले और गोलियों की आवाजें गवाही दे रही हैं कि पाकिस्तान अपने ही कब्जे वाले क्षेत्र को एक खुली जेल में तब्दील कर चुका है।

वैश्विक मंच पर गूंजी पुकार: “अब चुप मत रहो!”

PoK में चल रहे इस नरसंहार और सरकार द्वारा प्रायोजित जुल्म के खिलाफ अब वैश्विक स्तर पर भी आवाजें उठने लगी हैं। ‘जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज’ (JSMM) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बेहद भावुक और जरूरी अपील रखी है। उन्होंने न केवल इस क्रूरता की कड़े शब्दों में निंदा की, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN), भारत, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और मध्य पूर्व के देशों से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। बुरफत का कहना है कि यदि आज दुनिया खामोश रही, तो PoK और सिंध के मासूम लोगों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। इस वैश्विक अपील ने अब संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस बार पाकिस्तान पर सख्त प्रतिबंध लगाएंगे, या फिर PoK की जनता को यूँ ही अपनी जान गंवानी पड़ेगी? भारत द्वारा पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर घेरे जाने के बाद, अब गेंद पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के पाले में है।

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