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स्कूल में पढ़ाई छोड़ बच्चों से कराया गया ऐसा काम! जांच हुई तो टीचर पर गिर गई सस्पेंशन की गाज

बिजनौर के सरकारी स्कूल में शिक्षिका पर स्कूल में बकरा बांधने, बच्चों से चारा कटवाने और 4.40 लाख रुपये के सरकारी फंड में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाने के बाद BSA ने उन्हें तत्काल सस्पेंड कर दिया।

बिजनौर

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से सरकारी स्कूल का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका को गंभीर आरोपों के बाद निलंबित कर दिया गया है। मामला अल्हैपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भिक्कावाला का है। आरोप है कि शिक्षिका काशिमा खातून स्कूल में पढ़ाई कराने के बजाय बकरीद से पहले अपना बकरा लेकर आती थीं और उसे स्कूल परिसर में बांध देती थीं। इतना ही नहीं, बच्चों से बकरे के लिए चारा और पेड़ों के पत्ते भी कटवाए जाते थे। जब इस बात की जानकारी बच्चों के अभिभावकों को मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत प्रशासन से की। शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई, जिसमें कई आरोप सही पाए गए।

बच्चों से चारा कटवाने और सरकारी धन में गड़बड़ी का आरोप

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ छात्रों को पढ़ाई के समय जंगल भेजा जाता था, जहां से वे बकरे के लिए हरा चारा और पत्तियां लेकर आते थे। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि बच्चों से ऐसा काम करवाना पूरी तरह गलत है और इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही थी। इसके अलावा शिक्षिका पर स्कूल की बाउंड्री वॉल बनाने के लिए मिले करीब 4.40 लाख रुपये के सरकारी फंड के इस्तेमाल में भी गड़बड़ी करने का आरोप लगा। शिकायत में कहा गया कि तय काम पूरा नहीं हुआ, जबकि धनराशि खर्च दिखाई गई। इन आरोपों को भी जांच समिति ने गंभीर माना। इसके बाद पूरी रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को सौंपी गई।

BSA ने तुरंत किया सस्पेंड, विभाग में मचा हड़कंप

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना ने शिक्षिका काशिमा खातून को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आदेश में कहा गया कि शिक्षिका का व्यवहार सरकारी कर्मचारी के दायित्वों के अनुरूप नहीं था और उनके कार्यों से शिक्षा विभाग की छवि खराब हुई है। विभाग ने माना कि स्कूल शिक्षा का केंद्र होता है, जहां बच्चों को पढ़ाई और अच्छे संस्कार मिलने चाहिए, लेकिन यदि स्कूल का उपयोग निजी कामों के लिए किया जाए तो यह नियमों का उल्लंघन है। निलंबन के दौरान शिक्षिका को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और उन्हें फिलहाल प्राथमिक विद्यालय से हटाकर ब्लॉक संसाधन केंद्र (BRC) से संबद्ध किया गया है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, अभिभावकों ने की सख्त कार्रवाई की मांग

इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होती है, लेकिन अगर उनसे पढ़ाई की जगह दूसरे काम कराए जाएं तो यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में सिर्फ निलंबन ही नहीं, बल्कि अगर वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो आगे भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की आगे भी जांच जारी रहेगी और यदि अन्य तथ्य सामने आते हैं तो नियमों के अनुसार अगली कार्रवाई की जाएगी।

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