उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां महज़ 44 लाख रुपये के बीमा क्लेम की लालच में एक पति ने अपनों के साथ मिलकर अपनी ही पत्नी की निर्मम हत्या कर दी। लालपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पौथिया नहर मार्ग स्थित बैठका धाम मंदिर के पास सड़क किनारे रीता नाम की महिला का शव बरामद हुआ था। शुरुआत में यह पूरा मामला महज एक सामान्य सड़क दुर्घटना लग रहा था, लेकिन मृतका के पिता द्वारा दी गई शिकायत के बाद जब पुलिस ने गहराई से तहकीकात शुरू की, तो इस खौफनाक वारदात की परतें एक-एक करके खुलने लगीं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरी आपराधिक साजिश को किसी और ने नहीं, बल्कि मृतका के पति अमर सिंह ने ही अपने साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। हैरानी की बात यह है कि इस हत्या की पटकथा घटना से करीब दो महीने पहले ही लिख दी गई थी, जब 26 जून को रीता के नाम पर 44 लाख रुपये की एक बड़ी बीमा पॉलिसी कराई गई थी ताकि मौत के बाद मिलने वाली रकम को आपस में बांटा जा सके।
चचेरे भाई समेत चार दरिदों ने मिलकर दिया वारदात को अंजाम
इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पति अमर सिंह ने खुद अपने ही परिवार और जान-पहचान के लोगों को शामिल किया। पुलिस के मुताबिक, इस साजिश में मृतका का चचेरे भाई अमित गुप्ता, पुष्पेंद्र सोनी और अभय सिंह भी मुख्य रूप से शामिल थे। साजिश के तहत वारदात की रात को पति अमर सिंह अपनी पत्नी रीता को मामूली दवा दिलाने के बहाने घर से बाहर लेकर निकला था। उसे क्या पता था कि जिस हमसफर पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती है, वही उसकी जिंदगी का सौदा कर चुका है। तय योजना के मुताबिक रास्ते में पहले से ही घात लगाकर बैठे अन्य आरोपियों ने मिलकर अर्टिगा कार से रीता को एक बार नहीं बल्कि कई बार कुचला, जिससे उसकी तड़प-तड़प कर मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने इस खौफनाक कृत्य को एक सड़क हादसे का रूप देने के लिए शव को सड़क के किनारे लावारिस हालत में फेंक दिया और वहां से फरार हो गए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सर्विलांस से खुला सच
घटना के बाद से ही पुलिस इस पूरे मामले को संदिग्ध मानकर इसकी जांच में जुटी हुई थी। शुरुआती तीन दिनों तक चले कड़े संघर्ष, तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल सर्विलांस और मुखबिरों से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को पूरी तरह सुलझा लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पति समेत सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई अर्टिगा कार और एक सिम कार्ड भी बरामद कर लिया है। वहीं, जब रीता का पोस्टमार्टम कराया गया तो उसकी रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश पर मुहर लगा दी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महिला के शरीर पर 12 से अधिक गंभीर बाहरी और अंदरूनी चोटें थीं, जो यह साबित करने के लिए काफी थीं कि उसकी मौत किसी सामान्य हादसे में नहीं, बल्कि बेहद बेदर्दी से गाड़ी से कुचलकर की गई है। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाकर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया है।
हमीरपुर पुलिस की मुस्तैदी से बेनकाब हुआ शातिर षड्यंत्र
हमीरपुर का यह मामला महज़ एक मर्डर मिस्ट्री का अंत नहीं है, बल्कि यह इंसानी रिश्तों में लालच और धोखे की पराकाष्ठा का एक जीता-जागता उदाहरण है। आरोपियों ने सोचा था कि वे बीमा कंपनी और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर आसानी से 44 लाख रुपये का क्लेम हड़प लेंगे और कानून को हमेशा के लिए चकमा देते रहेंगे। लेकिन हमीरपुर पुलिस की सूझबूझ, तकनीकी सर्विलांस और त्वरित तीन दिनों की सघन जांच ने इन शातिर अपराधियों के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि कानून के लंबे हाथ अपराधियों तक पहुंच ही जाते हैं। फिलहाल, पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेज दिया है और इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहराई से कानूनी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की वारदातों को रोका जा सके।
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