केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan अपने पैतृक गांव खगड़िया के शहरबन्नी पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दिवंगत चाचा अर्जुन पासवान को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान चिराग ने सबसे पहले अपनी बड़ी मां Rajkumari Devi के पास जाकर उनके पैर छुए। बड़ी मां ने उन्हें गले लगा लिया और चिराग की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह पल दर्शाता है कि पारिवारिक रिश्तों में भावनाओं का कितना महत्व है, और इससे यह भी संकेत मिलता है कि चाचा-पुत्री के बीच लंबे समय से बनी दूरी पिघलने लगी है।
चाचा पशुपति पारस का नरम रुख
पूर्व केंद्रीय मंत्री Pashupati Kumar Paras ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अलग होते हैं, लेकिन खून का रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि Chirag Paswan ने पारंपरिक मिथिला रीति के अनुसार उनका पैर छूकर प्रणाम किया, और इस gesture के बाद उनका तेवर नरम पड़ गया। पशुपति पारस ने संवाददाताओं से कहा कि राजनीति में कल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता, लेकिन परिवार का रिश्ता हमेशा कायम रहता है। इस घटना ने यह साबित किया कि व्यक्तिगत और पारिवारिक सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर है।
बंद कमरे में हुई अहम बातचीत
Chirag Paswan और पशुपति पारस के बीच करीब पांच मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। दोनों के चेहरे के भाव यह दर्शा रहे थे कि पुरानी दूरियों को मिटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि बातचीत की पूरी सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन इस मुलाकात ने संकेत दे दिया कि पारिवारिक रिश्तों में अब फिर से गर्मजोशी लौट रही है। इसी दौरान चिराग ने अपने छोटे भाई और पूर्व सांसद Prince Raj से भी मुलाकात की और दोनों भाई एक-दूसरे को गले लगाकर भावनाओं का इजहार किया। समर्थकों ने इस दौरान जोरदार नारेबाजी की, जिससे माहौल और भी उत्साहित हो गया।
क्या अब खत्म होगी राजनीतिक दूरियां?
यह मिलन सिर्फ पारिवारिक भावनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक संकेत भी साफ दिखाई दिए। लंबे समय से चाचा-पुत्री और परिवार के बीच चली आ रही दूरियों को मिटाने का यह कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर पारिवारिक रिश्तों में फिर से एकता आती है, तो यह आगामी चुनावों और पार्टी के भीतर रणनीति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल इस मुलाकात ने पारिवारिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर सकारात्मक संदेश दिया है।
Read More-UP चुनाव 2027: AIMIM का दावा, मायावती भी नहीं रोक पाएंगी यह गठबंधन!
