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पिता बड़े नेता, खुद चुना अलग रास्ता… बिना शादी के CM की कुर्सी तक कैसे पहुंचे शुभेंदु अधिकारी?

जानिए शुभेंदु अधिकारी का पूरा जीवन सफर—परिवार, राजनीति, नंदीग्राम आंदोलन से लेकर CM बनने तक की कहानी

Suvendu Adhikari

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ Suvendu Adhikari का नाम अब मुख्यमंत्री के तौर पर चर्चा में है। लेकिन उनकी कहानी सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि संघर्ष और अलग फैसलों से भरी हुई है। एक मजबूत राजनीतिक परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने अपनी पहचान खुद बनाई। उनके पिता Sisir Adhikari लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्रीय स्तर तक अपनी पकड़ बनाई। परिवार के अन्य सदस्य भी राजनीति में हैं, लेकिन शुभेंदु अधिकारी ने अपने फैसलों और काम के जरिए खुद को अलग साबित किया।

नंदीग्राम आंदोलन से मिली पहचान

शुभेंदु अधिकारी का नाम पहली बार बड़े स्तर पर तब चर्चा में आया जब उन्होंने नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। उस समय यह मुद्दा पूरे राज्य में छाया हुआ था। इस आंदोलन ने उन्हें एक मजबूत जमीनी नेता के रूप में स्थापित किया। उस दौर में हुए घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी और शुभेंदु अधिकारी को एक पहचान दिलाई। इसी के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और वह राज्य के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।

कांग्रेस से टीएमसी और फिर भाजपा तक का सफर

अगर उनके राजनीतिक करियर को देखें, तो उन्होंने शुरुआत कांग्रेस से की थी। इसके बाद वह लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़े रहे और सरकार में मंत्री भी बने। Mamata Banerjee के करीबी माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी ने बाद में भाजपा का दामन थाम लिया। इस फैसले ने उनकी राजनीति को नया मोड़ दिया। भाजपा में आने के बाद उन्होंने तेजी से अपनी पकड़ मजबूत की और चुनावों में अहम भूमिका निभाई, जिसके चलते आज वह मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गए हैं।

निजी जिंदगी, पढ़ाई और संपत्ति की जानकारी

शुभेंदु अधिकारी की निजी जिंदगी भी काफी अलग रही है। उन्होंने शादी नहीं की है और पूरी तरह राजनीति पर ध्यान दिया है। पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मेदिनीपुर से स्कूली शिक्षा हासिल की और बाद में स्नातक व स्नातकोत्तर की डिग्री ली। उनकी संपत्ति की बात करें तो हालिया जानकारी के अनुसार उनके पास करीब 85 लाख रुपये से ज्यादा की संपत्ति है और उनकी सालाना आय लगभग 17 लाख रुपये के आसपास बताई जाती है। बिना किसी बड़े कर्ज के वह सादगी भरी जिंदगी जीते हैं। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने राज्य को नई दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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