Chirag Paswan: बिहार की राजधानी पटना में शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस की कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बिहार लोक सेवा आयोग की शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया जा रहा था, लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। इस दौरान कई अभ्यर्थी घायल हो गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
चिराग पासवान का बयान, सरकार को दी सलाह
इस घटना पर केंद्रीय मंत्री Chirag Paswan ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है और उनकी आवाज को सुनना सरकार की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग करना संवाद और संवेदनशीलता के खिलाफ है। चिराग पासवान ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि अभ्यर्थियों की मांगों को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द TRE-4 की अधिसूचना जारी की जाए। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं से भी संयम बरतने और सरकार को थोड़ा समय देने की बात कही।
सरकार पर उठे सवाल
लाठीचार्ज की घटना को लेकर विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष Rajesh Ram ने इस कार्रवाई को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से अभ्यर्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, वह सरकार की कार्यशैली को दिखाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आर्थिक दबाव में है और जनता की समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है, वहीं सरकार की तरफ से अभी तक इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अभ्यर्थियों की मांग
शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 की अधिसूचना को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो रही, जिससे उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है। इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार जल्द इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाएगी या फिर यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल, सभी की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। अगर संवाद के जरिए समाधान निकाला जाता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन अगर देरी जारी रही तो विरोध और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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