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चुनाव से पहले 30 नेताओं ने एक साथ छोड़ा अखिलेश यादव का साथ, ओपी राजभर की पार्टी में हुए शामिल

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय सचिव सहित 30 पदाधिकारी सुभासपा में शामिल हो गए। ओपी राजभर की पार्टी ने संगठन विस्तार तेज किया।

UP Politics

UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। समाजवादी पार्टी (सपा) को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सहित लगभग 30 पदाधिकारी एक साथ पार्टी छोड़कर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) में शामिल हो गए। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पकड़ बढ़ाने में जुटे हुए हैं। सपा से एक साथ इतने बड़े पैमाने पर नेताओं का जाना पार्टी संगठन के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है।

सुभासपा का संगठन विस्तार तेज

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने अपने संगठन विस्तार अभियान को तेज करते हुए नए चेहरों को शामिल करना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार को पार्टी में समाजवादी पार्टी और बुनकर मजदूर विकास समिति से जुड़े कई प्रमुख पदाधिकारियों, ग्राम प्रधानों और कार्यकर्ताओं ने सदस्यता ली।
इस मौके पर सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर मौजूद रहे, जिन्होंने सभी नए सदस्यों को पार्टी में शामिल कराया। उन्होंने कहा कि पार्टी का आधार लगातार मजबूत हो रहा है और विभिन्न राज्यों से नए लोग जुड़ रहे हैं, जिससे संगठन को नई ऊर्जा मिल रही है।

सपा के राष्ट्रीय सचिव सहित कई बड़े नाम शामिल

पार्टी छोड़कर सुभासपा में शामिल होने वालों में सबसे प्रमुख नाम सपा के राष्ट्रीय सचिव जावेद आलम का है। इसके अलावा बुनकर मजदूर विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शहाबुद्दीन अंसारी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नाजिम अंसारी, युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ताजुद्दीन अंसारी और कई अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह सभी नेता दिल्ली, लखनऊ, गाजियाबाद, बिजनौर, प्रतापगढ़, अमरोहा और अन्य जिलों से जुड़े हुए हैं। एक साथ इतने बड़े संगठनात्मक स्तर के नेताओं का पार्टी छोड़ना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

अखिलेश यादव पर सीधा हमला

कार्यक्रम के दौरान सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा का पीडीए (PDA) नारा समय और राजनीतिक जरूरत के हिसाब से बदलता रहता है, जिससे उसकी गंभीरता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यहां तक कह दिया कि “पीडीए का मतलब पार्टी ऑफ डिंपल एंड अखिलेश” है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है और इसे सपा पर सीधा हमला माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी और दल-बदल की घटनाएं यूपी की सियासत को और अधिक दिलचस्प और टकरावपूर्ण बना देंगी।

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