केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ लगाए जा रहे झूठे आरोपों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में 10 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है। हिमायनी ने कहा है कि उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मीडिया रिपोर्ट्स में जेफरी एपस्टीन से जुड़े झूठे दावों में घसीटा गया, जबकि उनका इससे कोई संबंध नहीं है। मुकदमे में यह भी कहा गया कि झूठे आरोपों ने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया और उनका व्यक्तिगत व पेशेवर जीवन प्रभावित हुआ।
कौन से आरोप लगाए गए और हिमायनी का जवाब
हिमायनी पुरी पर आरोप लगाए गए थे कि उनका एपस्टीन और उसकी आपराधिक गतिविधियों से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तीय या नेटवर्क संबंध था। इसके अलावा दावा किया गया कि उनके कार्यस्थल रियल पार्टनर्स LLC ने एपस्टीन या उनके सहयोगियों से फंड प्राप्त किए और करप्शन के जरिए वित्तीय लाभ कमाया। हिमायनी के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि ये आरोप पूरी तरह से झूठे, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यात्मक रूप से निराधार हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भ्रामक कैप्शन, एडिटेड वीडियो और छेड़छाड़ किए गए थंबनेल के माध्यम से उन्हें बदनाम किया गया है।
सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की मांग
हिमायनी ने मामले में न केवल 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स — X, Google, Meta, LinkedIn — को निर्देश देने की भी याचिका दायर की है कि भविष्य में उनके खिलाफ ऐसे झूठे और मानहानिकारक आरोप दिखाई दें तो उसे तुरंत हटाना होगा। उन्होंने स्थायी निषेधाज्ञा की मांग भी की है ताकि उन्हें और उनके परिवार को भारत और वैश्विक स्तर पर बदनाम होने से रोका जा सके। मामले की सुनवाई मंगलवार को होने की संभावना है।
सीनियर वकील महेश जेठमलानी का पक्ष
इस मुकदमे को हिमायनी पुरी की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने अदालत में पेश किया। जेठमलानी ने तर्क दिया कि हिमायनी को जागरूक तरीके से और सुनियोजित रूप से निशाना बनाया गया, केवल इसलिए कि वह केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हैं। उनका कहना था कि इन आरोपों का उद्देश्य उनके और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को धूमिल करना है और जनता के बीच उन्हें बदनाम करना है। वकील ने अदालत से अपील की है कि झूठी जानकारी फैलाने वालों और संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
