उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसी बीच पंचायती राज मंत्री Om Prakash Rajbhar ने बड़ा बयान देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। सुल्तानपुर दौरे पर पहुंचे मंत्री राजभर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पंचायत चुनाव हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार कराए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानून के दायरे में रहकर ही आगे की प्रक्रिया तय करेगी। उनके इस बयान के बाद प्रदेश भर के ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत प्रतिनिधियों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। चुनाव समय पर होंगे या पंचायतों का कार्यकाल बढ़ेगा, इसे लेकर लोगों की नजर अब सरकार और अदालत दोनों पर टिकी हुई है।
कार्यकाल बढ़ेगा या प्रशासक बैठेंगे?
मंत्री राजभर ने चुनाव में देरी की संभावना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश तय समय पर पंचायत चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो अदालत के आदेश के अनुसार अगला फैसला लिया जाएगा। इसमें दो विकल्प सामने आ सकते हैं, पहला पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाना और दूसरा प्रशासकों की नियुक्ति करना। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में संवैधानिक व्यवस्था से बाहर जाकर फैसला नहीं करेगी। इस बयान को पंचायत प्रतिनिधियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों का भविष्य इसी निर्णय पर निर्भर करेगा। ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय प्रशासनिक फैसले पंचायतों के माध्यम से ही संचालित होते हैं, इसलिए यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।
सुल्तानपुर दौरे में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मंत्री राजभर सोमवार को सुल्तानपुर जिले में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे थे। जिला पंचायत सभागार में मीडिया से बातचीत के बाद उन्होंने महिला मोर्चा की रैली में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने महिला आरक्षण और विपक्ष की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में है, लेकिन विपक्ष ने इसमें सहयोग नहीं किया। राजभर ने आरोप लगाया कि कुछ दल महिलाओं को अधिकार मिलने की बात तो करते हैं, लेकिन जब निर्णय का समय आता है तो विरोध करने लगते हैं। उनके इस बयान को आने वाले चुनावी माहौल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ी सियासी सरगर्मी
राजभर के बयान के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं। पंचायत चुनाव को ग्रामीण राजनीति की सबसे बड़ी परीक्षा माना जाता है, क्योंकि इससे गांव स्तर पर नेतृत्व तय होता है। ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक की राजनीति का असर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक दिखाई देता है। ऐसे में चुनाव समय पर होंगे या नहीं, यह सवाल सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम है। फिलहाल सरकार की ओर से साफ संकेत दिया गया है कि कोर्ट के आदेश को सर्वोपरि रखा जाएगा। अब आने वाले दिनों में प्रशासनिक तैयारी, कानूनी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सबकी नजर बनी रहेगी। उत्तर प्रदेश के लाखों मतदाताओं और जनप्रतिनिधियों को अब अगली आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।