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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर संजय राउत का बड़ा बयान: ‘चीन-रूस के टैंकर निकल रहे, भारत क्यों रुका?’ फिर सामने आई सरकार की नई जानकारी

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीन और रूस के टैंकर गुजर रहे हैं, जबकि भारत को रोका गया था। बाद में भारत-ईरान बातचीत के बाद भारतीय टैंकरों को अनुमति मिल गई।

Sanjay Raut

Sanjay Raut: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है। इसी बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने चीन, रूस और बांग्लादेश के तेल टैंकरों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है, लेकिन भारत के टैंकरों को अभी तक अनुमति नहीं दी गई थी।

संजय राउत ने कहा कि दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट से अगर अन्य देशों के जहाज गुजर सकते हैं, तो भारत को क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने इसे देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा सवाल बताया और सरकार से जवाब मांगा। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री को ‘विश्व नेता’ कहा जाता है, तो फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति ऐसी क्यों दिखाई दे रही है।

उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री और सरकार पर भी साधा निशाना

संजय राउत ने अपने बयान में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब देश के सामने अंतरराष्ट्रीय संकट जैसी स्थिति बन रही है, तब सरकार को इस विषय पर स्पष्ट रूप से सामने आकर बात करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इन दिनों विभिन्न राज्यों में चुनावी सभाओं और प्रचार कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, जबकि देश के सामने तेल आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा खड़ा है। राउत के अनुसार, अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में सरकार को जनता को भरोसा देना चाहिए कि स्थिति नियंत्रण में है और ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। राउत का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय नेतृत्व की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

तेल और एलपीजी आपूर्ति को लेकर जताई चिंता

संजय राउत ने यह भी दावा किया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-इजरायल तनाव का असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में डर और असमंजस का माहौल बन रहा है।

उनके अनुसार इस स्थिति का असर व्यापार और रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट जैसे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं और कुछ जगहों पर लगभग 40 प्रतिशत तक कारोबार बंद होने की बात सामने आ रही है।

राउत ने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी दे और लोगों के बीच फैल रही आशंकाओं को दूर करे। उनका कहना था कि ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना जरूरी है।

विदेश मंत्रियों की बातचीत के बाद स्थिति में बदलाव

हालांकि संजय राउत के बयान के बीच ही इस मामले में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के बाद स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

बताया गया है कि भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय झंडे वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। यह समुद्री मार्ग कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है

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