झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा से एक ऐसी दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। करीब 13 साल पहले एक छह साल का बच्चा अचानक अपने परिवार से बिछड़ गया था। यह घटना उस समय हुई जब वह अपने पिता के साथ मजदूरी के लिए दूसरे राज्य जा रहा था। रेलवे स्टेशन की भीड़ और अफरा-तफरी के बीच बच्चा अपने पिता से अलग हो गया और घबराहट में एक ट्रेन में चढ़ गया।
उस मासूम को यह पता ही नहीं था कि वह जिस ट्रेन में बैठा है, वह उसे हजारों किलोमीटर दूर ले जाने वाली है। ट्रेन सीधे दक्षिण भारत के राज्य केरल की ओर जा रही थी। जब तक उसे अपनी गलती का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस तरह एक छोटी सी भूल ने उसे अपने घर और परिवार से करीब 2500 किलोमीटर दूर पहुंचा दिया। उस समय बच्चा इतना छोटा था कि उसे अपने गांव और परिवार के बारे में पूरी जानकारी भी याद नहीं थी।
केरल में गुजरे बचपन के 13 साल
जब ट्रेन केरल के एर्नाकुलम स्टेशन पहुंची तो वहां मौजूद कुछ लोगों की नजर उस बच्चे पर पड़ी। वह डरा हुआ था और किसी को पहचान नहीं पा रहा था। इसके बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल कल्याण अधिकारियों ने उसे सुरक्षित जगह पर पहुंचाया और एक चाइल्ड केयर सेंटर में रखवाया गया।
धीरे-धीरे बच्चा वहीं पलने-बढ़ने लगा। उसने केरल में ही पढ़ाई शुरू की और वहां की भाषा मलयालम भी सीख ली। समय के साथ उसने खेलों में भी रुचि दिखाई और फुटबॉल खेलने लगा। स्थानीय लोगों और संस्थाओं की मदद से उसे शिक्षा और रहने की सुविधा मिलती रही।
हालांकि इतने सालों के दौरान उसने नई जिंदगी तो बना ली, लेकिन अपने परिवार की यादें उसके मन से कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। उसे अपने माता-पिता के चेहरे धुंधले-धुंधले याद थे और वह अक्सर सोचता था कि क्या वह कभी उनसे दोबारा मिल पाएगा।
सोशल मीडिया और लोगों की मदद से मिला परिवार का पता
कई साल बीतने के बाद एक दिन उसकी कहानी सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंची। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसकी पूरी कहानी एक वीडियो के माध्यम से साझा की, जिसमें उसने अपने बचपन की कुछ यादें बताई थीं। इसी वीडियो के जरिए उसके गांव और परिवार के बारे में सुराग मिलने शुरू हुए।
इसके बाद स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और पुलिस ने मिलकर उसके परिवार की तलाश शुरू की। धीरे-धीरे जांच के बाद पता चला कि वह झारखंड के चाईबासा इलाके के एक गांव का रहने वाला है।
पुलिस और बाल कल्याण समिति ने सभी जरूरी दस्तावेजों और जानकारी की जांच की। जब पूरी तरह पुष्टि हो गई कि वही बच्चा है जो सालों पहले अपने परिवार से बिछड़ गया था, तब उसे उसके घर वापस भेजने की तैयारी शुरू की गई। यह खबर सुनकर उसके परिवार में भी खुशी और भावुकता का माहौल बन गया।
13 साल बाद मां से मिलकर भावुक हुआ बेटा
आखिरकार वह दिन भी आ गया जिसका इंतजार बच्चे और उसके परिवार को कई वर्षों से था। जब वह 13 साल बाद अपने गांव पहुंचा और अपनी मां के सामने खड़ा हुआ तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
बताया जाता है कि मां को देखते ही वह खुद को रोक नहीं पाया और भावुक होकर रो पड़ा। मां ने भी अपने बेटे को गले लगा लिया और लंबे समय तक दोनों एक-दूसरे से लिपटकर रोते रहे। इतने साल बाद बेटे के लौटने से पूरे गांव में खुशी का माहौल बन गया।
आज वह बच्चा 19 साल का हो चुका है। उसने जीवन के 13 साल अपने परिवार से दूर बिताए, लेकिन आखिरकार वह अपने घर लौट आया। यह कहानी इस बात की मिसाल है कि किस्मत चाहे जितनी दूर ले जाए, परिवार से जुड़ा रिश्ता और उम्मीद कभी खत्म नहीं होती।
