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ईरान-इजरायल जंग के बीच चीन का बड़ा फैसला! उठाया ऐसा कदम कि दुनिया में मच गई खलबली

ईरान-इजरायल तनाव के बीच चीन ने रिफाइंड ऑयल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।

China

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को एक बार फिर अस्थिर कर दिया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों और लगातार हो रहे हमलों के कारण दुनिया भर के देशों में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस तनाव का असर सबसे ज्यादा उस समुद्री मार्ग पर दिखाई दे रहा है जिसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है — होर्मुज स्ट्रेट।

अगर इस क्षेत्र में संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कई देशों की ऊर्जा जरूरतें इसी क्षेत्र से आने वाले तेल पर निर्भर हैं। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी है।

इस बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं और तेल भंडारण तथा आपूर्ति को लेकर नए फैसले ले रहे हैं।

चीन ने तेल निर्यात पर लगाई अस्थायी रोक

वैश्विक हालात को देखते हुए चीन ने भी एक बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने मार्च महीने के लिए रिफाइंड ऑयल यानी परिष्कृत तेल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला चीन की सरकारी संस्था नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन की ओर से जारी किया गया है।

इस आदेश के तहत गैसोलीन, डीजल और एविएशन फ्यूल जैसे उत्पादों को विदेशी बाजारों में भेजने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। माना जा रहा है कि चीन ने यह कदम अपने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया है, ताकि देश के अंदर किसी तरह की कमी या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति पैदा न हो।

चीन दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है। ऐसे में उसका यह फैसला वैश्विक तेल और गैस बाजार पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी सक्रिय हुईं

तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कदम उठाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने घोषणा की है कि उसके सदस्य देश संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए अपने आपातकालीन भंडार से तेल जारी करेंगे।

जानकारी के मुताबिक लगभग 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल इस आपातकालीन भंडार से बाजार में लाया जा सकता है, ताकि आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार 1973 के तेल संकट के बाद यह कुछ गिने-चुने मौकों में से एक है जब इतनी बड़ी मात्रा में आपातकालीन भंडार को उपयोग में लाने की योजना बनाई गई है।

आईईए का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा चलता है तो वैश्विक बाजार में तेल की कमी और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। ऐसे में समय रहते आपूर्ति बढ़ाना जरूरी हो जाता है।

अमेरिका ने भी खोला रणनीतिक तेल भंडार

इस संकट के बीच अमेरिका ने भी ऊर्जा बाजार को संतुलित रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।

मिडिल ईस्ट में तनाव 28 मार्च को उस समय अचानक बढ़ गया था जब इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसे लगभग दो सप्ताह से अधिक समय हो चुका है।

अगर यह संघर्ष लंबा चलता है तो तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्गों पर जोखिम बढ़ सकता है। इसका असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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